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पिताजी!🙏

 

एक  शख्स  जो  हमारी  जिंदगी  में  सबसे  अहंम  किरदार  अदा  करते  है।
एक  शख्स  जो  हमारी  जिंदगी  को  सवारने  में  खुद  की  गवा  देते  है।
एक  शख्स  जो  ना  जाने  किन  हालातो  से  गुजरते  है  कि  हम  खुश  रहे
वो  होते  है,  पिता!🙏

वो  शख्स  जो  कभी  हम  जैसे  ही  लापरवाह  और  अपने  सपनो  को  जीने  की  इच्छा  रखते  होंगे।
वो  शख्स  जो  हमारे  जैसे  ही  जिंदगी  में  बेपरवाह  और  आज़ाद  रहने  को  सोचते  होंगे।

पर  वही  शख्स  जब  पिता  बनता  है,  तो उसकी  ख्वाइशें  जिम्मेदारियां  बन  जाती  है।
उसके  खुद  के  लिए  देखे  सारे  सपने  धुंधले  हो  जाते  है।
उसकी  आज़ादी  उन  पैसों  को  कमाने  में  चली  जाती  जिनसे  वो  पूरा  जीवन  अपने  पिता  होने  का  कर्ज  अदा  करता  है।

वो  सारे  सपने  जिन्हें  जीने  की  ख्वाहिश  की  थी  उन्हें  दिल  के  किसी  कोने  में  दफ्न  कर  लेता  है  पिता!
अपने  वजूद  को  मारकर  उन्हें  अपने  बच्चों  में  जिंदा  रखने  की  कोसिस  करता  है  पिता!
कई  बार  अपने  बच्चो  की  इच्छाओं  को  पूरा  करने  में  अपनी  हैशियत  से  बाहर  निकल  जाता  है  पिता!

वो  पिता  ही  होते  है  जो  खुद  तो  पुराने  कपड़ो  में  ही  कई  त्योहार  मना  लेते  है  पर  अपने  बच्चो  को  हर  बार  नए  दिलाते  है।
वो  पिता  ही  होते  है  जो  बिना  थके  अपने  ऊपर  ना  जाने  कितनी  जिम्मेदारियां  लेकर  चलते  है।
वो  पिता  ही  होते  है  जो  हमारी  जिंदगी  के  हर  मोड़  पर  जबतक  रहते  है  हमे  सिखाते  है,  डाँटते  है,  अच्छे  और  बुरे  का  फर्क  समझाते  है।
वो  हमें  बताते  है  कि  जिम्मेदारियों  से  कभी  भागना  नही  चाहिए  और  रिश्तों  को  सहेजना  भी  वही  सिखाते  है।
वो  हमें  जिंदगी  का  वो  संघर्ष  सिखाते  है,  जो  हमे  किताबो  में  पढ़ने  को  नही  मिलता।
वो  कई  फैसलों  में  खुद  को  कठोर  दिखाकर  बुरे  भी  बनते  है।
और  वो  बच्चो  के  बड़े  होने  पर  "आप  कुछ  नही  समझते  पापा"  वाला  टोंट  भी  सुनते  है।

ना  जाने  कैसे  हर  परिस्थिति  में  खुद  को  एक  जैसा  ही  रखते  है,  ना  कुछ  अच्छा  होने  पर  बहुत  खुश  होते  है,  ना  ही  किसी  दुख  में  बहुत  दुखी,  किसी  समस्या  में  बहुत  परेशान  भी  नही  होते।  शायद  उन्हें  पता  होता  है  कि  जीवन  की  इस  रेल  में  हर  तरह  की  बोगियां  मिलेगी  और  जाने  अनजाने  हमे  ये  भी  सिखाते  है  की  खुश  उतना  ही  होना  चाहिए  कि  अचानक  आये  किसी  दुख  को  हम  झेल  सके।  

किसी  से  सुना  था  मैंने  की  जीवन  मे  एक  अच्छा  इंसान  होना  बहुत  जरूरी  होता  है,  पर  शायद  उससे  पहले  एक  अच्छा  पिता  होना  ज्यादा  जरूरी  है,  तभी  तो  वो  हमें  एक  अच्छा  बेटा  एक  अच्छा  भाई  एक  अच्छा  पति  एक  अच्छा  पिता  और  सबसे  जरूरी  एक  बहुत  अच्छा  इंसान  बनने  की  प्रेरणा  देता  है।

मैंने  अपने  पापा  से  एक  बात  सीखी  है  की,  कई  बार  हम  सबकुछ  कर  के  भी  सबके  लिए  खास  नही  बन  पाते  है।  लेकिन  इसका  मतलब  ये  नही  की  अपना  कर्म  करना  ही  छोड़  दे,  हमे  फिर  भी  सबकी  खुशियों  का  ख्याल  रखना  ही  चाहिए,  क्योंकि  यही  जीवन  का  आधार  है।

वैसे  तो  कितना  कुछ  है  लिखने  को  पर  कुछ  चीज़ें  लिखी,  पढ़ी,  बोली  या  समझाई  नही  जा  सकती  है,  उन्हें  सिर्फ  अनुभव  करना  होता  है।  और  पापा  का  साथ  वही  अनुभव  है  जो  झलकता  है  हमारे  व्यवहार  में  हमारी  आदतों  में  हमारी  बोलचाल  और  हमारे  जीवन  मे  भी।
आखिर  में  बस  यही  कहूंगा  कि  हमे  कभी  इतना  बड़ा  नही  बनना  चाहिए  कि  हमारे  माँ-पापा  खुद  को  छोटा  महसूस  करने  लगे,  और  जिस  दिन  अपने  माँ-पापा  को  अपनी  जिम्मेदारी  ना  समझकर  अपनी  जरूरत  मान  लेंगे  उस  दिन  के  बाद  उनसे  दूर  होने  उन्हें  अकेला  छोड़ने  का  ख्याल  भी  दिल  मे  नही  आएगा।
नमस्कार🙏🙏🙏





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