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Beto ko smjhao...


Maaf kriyega ye post thoda lmba ho gya hai kya kru ye drd hi aisa hai.. pr plz pura pdhe

Must read 🙏


कभी  निर्भया  कभी  दामिनी  ना  जाने  कितनी  अनजान  भी  है
कभी  जलाते  कभी  मारते  ना  जाने  कैसे  ये  इंसान  भी  है
निकलती  है  जो  बहन  मेरी  भी  घर  से  कैसे  कहू  निकलती  मेरी  जान  भी  है
आंखों  में  आंसू  भर  कबतक  मैं  देखु  की  अपने  देश  में  ऐसे  ऐसे  हैवान  भी  है

बात  करते  है  सब  सिर्फ  की  महिला  की  सुरक्षा  हम  करेंगे
ना  जाने  ये  अपने  भरोसे  कबतक  इन  महिलाओं  को  खतरे  में  रखेंगे
मैं  हु  कहता  की  क्यों  नही  रोकते  है  ये  उनके  हाथ  जो  इनपर  पड़े
और  सब  हो  जाने  के  बाद  ये  कहते  है  कि  आओ  हम  मिलकर  विरोध  करें

खबरे  दिखा  कर  आंसू  बहकर  लूटते  है  खूब  ये  टी.आर.पी  के  मजे,
अगली  खबर   आने  तक  बस  ये  सारा  नाटक  चले।
मोमबत्ती  लेकर  ना  जाने  कबतक  निकलेंगे  लोग!
मैं  कहता  हूं  क्यों  न  हम  इसके  लिए  आखिर  तक  लड़े।
लेकिन  देखता  हूं  दो  दिन  बात  कर  सब  अपने  अपने  घर  को  चले।

कानून  और  इंसाफ  के  इंतज़ार  में  ना  जाने  कितनी  बेटियां  जली
रूह  कांप  जाती  है  ये  सुनकर  की  आज  कइयों  की  जान  फिर  नही  बची
क्यों  नही  कुछ  करते  है  ये  हमपर  राज़  करने वाले
मैं  कहता  हूं  गलती  हमारी  है  क्योंकि  ये  बात  हमारे  बीच  भी  सिर्फ  2दिन  ही  चली

इन  सब  के  बाद  भी  कुछ  लोग  लड़कियों  की  ही  गलतियां  निकालते  है।
ना  जाने  कैसे  है  ये  जो  इस  दरिंदगी  को  भी  धर्म  से  जोड़  जाते  है।
मैं  क्या  पहना  दु  अपनी  बहन  को  ऊपर  से  नीचे  तक  काले  कपड़े,
पर  डरता  हूँ  कि  ये  दरिंदे  तो  छोटी  बच्चियों  के  साथ  भी  दरिंदगी  कर  आते  है।

बेटी  बचाओ!  बेटी  पढ़ाओ!  का  नारा  तो  ये  देते  है।
पर  जब  बेटियां  पढ़  लिख  कुछ  बन  जाती  है  तो  ये  दरिंदे  कहा  उन्हें  जीने  देते  है।
मैं  कहता  हूं  बस  ये  नारा  देने  से  बेटियां  सुरक्षित  नही  होंगी,
हमारे  कानून  में  क्यों  नही  इन्हें  एक  सुनवाई  में  ही  फाँसी  की  सज़ा  देते  है।

भगवान  ना  करे  कि  ऐसा  हो  किसी  के  भी  साथ।  
पर  मैं  पूछता  हूं  कि  अगर  यही  होता  किसी  बड़े  की  बेटी  के  साथ।
तब  भी  क्या  फैसले  और  कानून  को  इतनी  देर  लग  जाती।
जितनी  देर  लग  जाती  है  एक  गरीब  की  बेटी  की  लिखने  में  एफ़. आई.आर।

इन्हें गिरफ्तार कर के जेल में ले जाकर हमारे ही पैसो से खिलाते है
और ये साले हमारी ही बहन बेटियों का रेप कर जेल में मज़े की जिंदगी बिताते हैं
कानून के नाम पर इस देश मे हमें बस ठेंगा ही दिखाते है
ना जाने क्यों इन रेपिस्टों को ये तुरन्त फाँसी  या  इनकाउंटर की मौत नही दे पाते है।


मार दो उन्हें, जला दो उन्हें, फाँसी पर चढ़ा दो उन्हें
जो करते है जैसा बहन बेटियो के साथ वैसी ही सज़ा दो उन्हें
रूह काप जानी चाहिए किसी भी शख्स की ऐसा सोच कर भी
डर जाए हर गन्दी निगाह और गन्दी सोच वाले, कोई ऐसी सज़ा दो उन्हें |

कई  बार  लगता  है  की  कुछ  फैसले  कानून  और  राजनीति  से  दूर  जनता  के  बीच  मे  होने  चाहिए,  क्योंकि  जिस  दिन  जनता  ने  ऐसे  4... 5  को  जलाकर  चौराहे  पर  टांग  दिया  न  उसी  दिन  एक  डर  पैदा  होगा  और  वो  डर  ही   उनके  लिए  सबक  बनेगा  जो  ऐसी  सोच  और  घिनोनी  मानसिकता  के  साथ  हमारे  बीच  रह  रहे  है  और  ऐसा  ख्याल  भी  उनके  अंदर  उठा  तो  वो  डर  ही  उन्हें  डरायेगा।

"डर  का  होना  बहुत  जरूरी  है,  क्योंकि  जब  इंसान  के  अंदर  से  इंसानियत  खत्म  हो  जाती  है तभी  वो  हैवान  बनता  है,  और  हैवान  कभी  वापस  इंसान  नही  बनते।"


Comments

  1. Police, media and government sab chup hai bcs vo garib ki beti thi agar yhi kisi leader ki beti ke sath hua hota to uski gaadi palat jaati lekin ye to garib ki beti hai na

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  2. Thank you bhaiya per aisa koi kre tab na

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