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Jindgi aur sapne part 2


#khwab

Khwab wo h jo aankho ki jmeen pr thr sa jata h
Khwab wo hai jo in plko ko bi nm kr jata hai
Bhut khamosh hote hai aise khwab lekin apna asar bhut gahra chod jaate hai
Khwab aisa jo raat k andhero me aakr din k ujaalo ko chin le jata hai,
jo mand padi icchhao ko bi achnk raftaar de jata hai
Jo jaagti aankho ko bi apna intezaar de jata hai
Wo hota hai khwab

Nadani me ki hue glti ki sza kai baar hm pure jeevan bhr kaatte hai
Wo glti jo spno ko mnzilo ko raasto ko sbkuch badl kr rkh deti hai
Tb hme pta bi nii hota ki hme jana kha hai phuchna kha hai kyuki us nadani me ki hue ek glti ki wjh se hmne sbkuch kho diya hai
To Ab bss chlna h, girna hai, uthna hai, fir chlna hai ar chlte hi rhna hai pr phuchna khi nii hai
Pta nii bina mnzil ki jindgi ho gyi hai yaa abi bi koi mnzil hai jo raasta bdlne ko kh to rhi hai pr hme to is duniya ki bhid me doudna hai kyuki sb daud rhe h

Aisi daud jisme hm na phle hote hai ar na dusre hm to sayd ginti me aate bi niii h pr daudna to fir bi hai yaa fir ek roz ye sb chodkr life me wo krna hai jo mujhe krna hai jisse mujhe khusi milti hai tb shyd mai duniya ki daud se nikl kr piche ho jaaunga lekin khud k liye hmesa phla hi bna rhunga

Pr is bhid se nikl kr apne raasto pr chlna itna aasan bi nhi hai kyuki hm darte hai ar wo dar bss hme piche hi nii khich rha h blki hme apni aadat bi lga rha hai.. m bi is dar se hi dar rha hu ar bss chl rha hu gir rha hu uth k fir chl rha hu pr phuchna kha hai mujhe nii pta hai.. bss chl rha hu

Khte hai ek mnzil wo hoti hai jo hm bnate hai ar ek mnzil wo jo bni bnayi hmare saath chlti hai pr khte hai n aankh k ekdm saamne rkhi chiz dhundhli dikhti hai aise hi hm khud se bnayi hue mnzil jo bhid ko dekhkr bnayi hai uske liye liye puri jaan lgaa dete hai lekin jis mnzil ko paane k liye bss uski aadhi hi mehnt krni hoti jiske liye hme bss bhid se alag hokr chlna hota hai hm nii krte hai...  

Pr ek roz is chain ko todkr is kaid se niklna hai ar khud ko khud se jitana hai.. logo ki shrm ko bhul bss apne raasto pr chlna hai ar muskurana hai...


Beshk log muskurayenge mujhe kaato pr chlta dekh
Pr ek roz in kaato k gulaab ki khusboo hi mere aangan ko mhkaayegi

        To be continue...

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