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देश को बचाना है ।


ना  जाने  ये  देश  किस  ओर  जा  रहा  है ।                     सही  को  छोड़  गलत  की  ओर  भाग  रहा  है ।

डॉक्टर, पुलिस  और  साधुओ  को  मारा  जा  रहा  है।
ना  जाने  ये  देश  किस  ओर  जा  रहा  है ।

मॉब  लॉन्चिंग  की  आड़  में  यहां  बहुत  कुछ  हो  रहा  है ।
ना  जाने  हमारा  हिंदुस्तान  किस  ओर  चल  रहा  है ।
पूरी  दुनिया  भुखमरी  और  महामारी  से  लड़  रही  है ।
एक  हमारा  देश  है  जहाँ  अपना  अपने  से  ही  लड़  रहा  है ।

धर्म  और  रंग  के  नाम  पर  इंसान  को  इंसान  से  लड़ा  रहे  है ।
लाठी  डंडो  से  2  को  300  पीट  पीट  कर  मार  रहे  है ।
जो  पुलिस  सुरक्षा  के  लिए  है  वो  भी  डर  कर  भाग  रहे  है ।
ऐसे  में  हम  कैसे  कहे  कि  हम  एक  सभ्य  समाज  मे  रह  रहे  है ।

कहा  गए  वो  बहुमुखी  और  अवार्ड  वापसी  वाले ।
कहा  गए  वो  अपने  हिंदुस्तान  में  रहने  से  डरने  वाले ।
ना  जाने  क्यों,  सबका  चश्मा  सिर्फ  एक  तरफ  देखता  है ।
खुद  सब  बातें  एकता  की  करते  है  और,  फिर  हर  बार  सवाल  सिर्फ  एक  पर  ही  उठता  है ।

कभी  छोटी  सी  बात  पर  भी  सब  बोल  उठते  है ।
कभी  बहुत  बड़ा  भी  कुछ  हो  जाए  फिर  भी  सब  मौन  रहते  है ।
हर  बार  इनकी  आवाज़  दबाती  है  सच्चाई  को ।
जो  गलत  करते  है  वो  हर  बार  ही  बच  निकलते  है ।

देश  की  सेना  शहीद  हो  रही  हमारी  सुरक्षा  में ।
डॉक्टर  और  पुलिस  भी  खड़े  है  हमारी  रक्षा  में ।
ये  हमारे  देश  का  ही  नही  हमारा  भी  नुकसान  है।
कुछ  लोगो  की  वजह  से  ही  हमारा  सारा  हिंदुस्तान  बदनाम  है ।

गरीब  मजदूर  बेचारे  जीने  के  लिए  तरस  रहे  है ।
कही  पटरियों  पर  कट  रहे  तो  कही  भूख  से  तड़प  रहे  है ।
ना  पूछो  अपने  देश  के  राजनेताओं  का  हाल ,
ये  इन  मुद्दों  पर  भी  राजनीति  कर  रहे  है ।

मन  में  हर  बार  बस  एक  ही  सवाल  आता  है ।
क्यों  हमारा  समाज  कुछ  मुट्ठी  भर  लोगो  से  घबराता  है ।
कोई  अगर  कुछ  कह  भी  दे  तो  पावर  वाला  कोई  उन्हें  डराता  है ।
राजनीति  से  दूर  रखने  वाले  मुद्दों  को  भी  ये  बाजार  में  उछालता  है ।
ये  कैसा  पावर  है  जो  सच  को  सच  बताने  पर  भी  मारता  है ।

एक  आतंकी  के  मरने  पर  पूरा  कश्मीर  आतंक  मचाता  है ।
गर  मर  जाये  कोई  सिपाही  तो  कोई  मोमबत्ती  तक  नही  जलाता  है ।

सेना  पर  पत्थर  फेकते  है  ये,  पुलिस  को  कारवाई  से  रोकते  है  ये ,
नही  आते  तब  कोई  नेता  सैनिको  के  बचाव  में !
कोई  हमे  भी  बताए  सैनिक  नही  आते  क्या  मानवाधिकार  में ।
गर  मार  दे  कोई  सैनिक  किसी  एक  को  अपनी  सुरक्षा  में !
तो  सारे  बुद्धिजीवी  जुट  जाते  है  नागरिको  और  आतंकियों  के  बचाव  में ।

बस  बहुत  हुआ  सम्मान  और  भाई - भाई  का  नाता ।
अब  चाहिए  इन्हें   हमारी  एकजुटता  का  चाटा,
बहुत  सह  लिया  है  हमने  अब  शोर  मचाने  की  बारी  है ।
हिंदुस्तान  हमारा  है  ये  सबको  बताने  की  बारी  है।

हम  जानते  है  सम्मान  करना  तो  तलवार  उठाना  भी  आता  है ।
उठाकर  देख  लो  इतिहास  हमारा  वीर  महाराणा प्रताप  जैसे  शूरवीरो  से  नाता  है ।
हम  पैरो  की  धूल  को  सिर  पर  लगाना  जानते  है। 
तो,  हमे  देश  पर  कलंक  लगाने  वालों  को  उसी  मिट्टी  में  मिलाना  भी  आता  है ।

बस  कहना  यही  है  कि  अब  भी  सुधर  जाओ ।
कही  ऐसा  ना  हो  कि  कुछ  कहने  के  काबिल  भी  ना  बच  पाओ ।
हमने  भी  अपने  अंदर  एक  आंधी  कैद  रखी  है,
कही  ऐसा  ना  हो  सब  अपनी  हरकतों  की  वजह  से  उसमे  हवा  हो  जाओ ।


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