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मातृ दिवस (mother's_ day)


एक  शब्द  ऐसा  है,  जिसका  कोई  अर्थ  नही ।
एक  शब्द  ऐसा  है,  जिसका  और  कोई  नाम  नही ।
एक  शब्द  ऐसा  है,  जिसके  ना  होने  से  जैसे  बिना  दिल  के  धड़कन  धड़कती  है ।
एक  शब्द  ऐसा  है,  जिसकी  कमी  ऐसी  है  जैसे  नाव  बिन  पानी  के  नदी  में  उतरती  है ।
ये  एक  शब्द  इतना  विशाल  और  अविश्वनीय  है  जिसे  मैं  कितना  भी  लिख  लू  खत्म  हो  नही  सकता ।

इस  एक  दिन  से  उस  शब्द  का  सम्मान  नही  होता ।
वो  एक  शब्द  'माँ' है,  जिसे  पूरा  जीवन  भी  दे  दे  तो  भी  इंसान  कृतार्थ  नही  होता ।

माँ  जो  खुद  को  दुखो  में  तड़पाकर अपने  बच्चे  को  खुशियों  की  छावं  देती  है ।
माँ  जो  खुद  को  भूख  से  जलाकर  अपने  बच्चे  के  पेट  को  रोटी  की  आंच  देती  है ।
वो  माँ  ही  होती  है  जो  ना  जाने  कितनी  पीड़ाओं  को  सहकर  अपने  बच्चे  को  नव  महीने  कोख़  में  आराम  देती  है ।

माँ  का  प्यार  ही  है,  जो  कभी  बटता  नही ।
माँ  का  दुलार  ही  है,  जो  कभी  घटता  नही ।
बच्चा  कितना  भी  दुःख  को  छिपाए  पर  माँ  से  छिपता  नही ।
वही  बच्चा  बड़ा  हो  जाये  तो  उसे  माँ  की  हंसी  में  छिपा  आंसू  कभी  दिखता  नही ।

बच्चे  के  दूर  होने  पर  माँ  का  हर  रोज़  फोन  आना ।
तू  ठीक  तो  है  ना  बार  बार  बस  यही  सवाल  दोहराना ।
खाने  के  सवाल  पर  आवाज़  में  थोड़ा  ठहराव  आना ।
वो  माँ  है  जिससे  मुश्किल  है  कुछ  भी  छिपा  पाना ।
हर  एक  माँ  अपने  बच्चे  की  पहली  टीचर  होती  है ।
हर  एक  माँ  अपने  बच्चे  को  चोट  लगने  पर  उससे  ज्यादा  रोती  है ।
मैं  क्या  लिखूं  उस  माँ  पर  जो  भगवान  से  भी  बढ़कर  है ।
वो  माँ  है  जो  अपने  आँचल  में  ना  जाने  कितने  शब्दो  को  पिरोती  है ।

कहते  है  भगवान  का  रूप  होती  है  माँ !
कुछ  कहते  है  उनसे  भी  ऊपर  होती  है  माँ !
मैं  क्या  कहूं  कभी  भगवान  को  तो  देखा  नही  मैंने,
पर  सच  कहते  है  सब  की  सबसे  ऊपर  और  सबसे  पहले  होती  है  माँ !

कितनी  बार  उस  माँ  को  भी  अपमान  सहना  पड़ता  है ।
जितना  सम्मान  होना  चाहिए  माँ  का  उतना  कौन  करता  है ।
अगर  सच  में  इस  दिखावे  की  दुनिया  में  माँ  के  लिए  औलादों  का  इतना  प्यार  होता ।
तो  कसम  से  यारो  हमारे  यहां  एक  भी  बृद्धाश्रम  ना  होता ।

माँ! ये  शब्द  एक  समुन्दर  है, जिसमे  ना  जाने  कितना  प्यार,  कितना  दुलार,  कितनी  सहनशक्ति,  कितना  दुख, कितनी  खुशी  और  ना  जाने  कितनी  ही  ऐसी  शक्तिया  निहित  है  जिन्हें  शब्दो  में  बयां  कर  पाना  मुमकिन  हो  नही  सकता ।

#mother's_day



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