Skip to main content

Bollywood(बदलाव जरूरी है)

मुझे  पता  है,  कि  आप  सब  मेरी  अनकही  कहानी  के  अगले  पार्ट  का  इंतज़ार  कर  रहे  है।  लेकिन  फिलहाल  इस  दौरान  एक  घटना  ऐसी  घटी  जिसने  मुझे  इसपर  लिखने  को  मजबूर  कर  दिया  है।

आज  ना  जाने  क्यों  बहुत  डरने  लगा  हू  मैं,  खुद  के  लिए  या  कहू  तो  हमसब  के  लिए।  हमसब  जो  किसी न किसी  सपने  से  जुड़े  है,  हमसब  जो  कोई न कोई  ऐसी  ख्वाहिश  रखते  है  जो  हमे  दुसरो  से  अलग  करती  है।  पर  क्या  हमारा  हमारे  सपनो  को  पूरा  करना  अपनी  ख्वाहिशो  को  पंख  देना  किसी  और  के  लिए  खतरा  बन  सकता  है?     ये  हादसा  इसे  ही  दरसाता  है...

वैसे  तो  मैं  उस  बन्दे  को  जानता  नही  था  और  शायद  ही  कभी  उससे  मिलता  भी,  लेकिन  ना  जाने  क्यों  उसकी  मौत  ने  मुझे  झकझोर  के  रख  दिया  है  और  मेरे  जैसे  कई  है  जिन्हें  इस  हादसे  से  तकलीफ  हुई  है  दिल  टूट  गया  है।                 ये  हादसा  जो  उस  शक्श  से  जुड़ा  है,  जो  एक  शानदार  अभिनेता  एक  अच्छा  इंसान  और  एक  ऐसा  व्यक्ति  था  जिसकी  पूरी  जिंदगी  सपनो  से  भरी  थी।      उसकी  गलती  सिर्फ  इतनी  थी  कि  उसने  अपनी  अदाकारी  और  अपने  सपनो  से  कइयों  को  डरा  दिया  था।   

काई पो चे  से  पहचान  बनाया !
एम एस धोनी  से  नाम  था  कमाया !
छिछोरे  से  जिसने  सभी  को  सबक  सिखाया !
अब  कैसे  मान  लू  मैं,  की  ऐसे  इंसान  ने  आत्महत्या  जैसा  कदम  है  उठाया ।

    किसी  का  डर  क्या  हो  सकता  है?  उसका  छोटी  जगह  से  आना  या  फिर  कम  समय  मे  ज्यादा  नाम  कमाना  या  फिर  अपने  नाम  और  पहचान  से  समझौता  ना  करना। 

आज  हम  दुखी  है, नाराज़  है,  गुस्सा  है,  क्योंकि  हमने  किसी  के  दर्द  को  महसूस  किया  है।  पर  हमें  ये  समझना  चाहिए  कि  हमने  देर  कर  दी  क्योंकि  ये  पहली  बार  नही  हो  रहा  है। ये  जो  nepotism  का  नारा  हम  दे  रहे  है  इसकी  वजह  से  ये  पहली  मौत  नही  हुई  है। क्या  ये  कुछ  लोग  जिनके  नाम  आज  उछल  रहे  है  इन्होंने  पहली  बार  ऐसा  किया  है?
  
अगर  हम  ये  लगता  है,  कि  ये  पहली  बार  हुआ  है  तो  हमे  याद  करना  चाहिए  कि  गुरुदत्त... दिव्या भारती... जिया खान... या  श्रीदेवी  जो  एक  बार  फिर  मूवीज  की  तरफ  रुख  कर  रही  थी  इनसब   की  मौत  का  रहस्य  किनसे  जुड़ा  है,  या  कहे  कि  ये  सब  जानते  हुए  भी  हमने  कुछ  नही  किया  और  ना  जाने  कितने  और  है  जो  इस  लिस्ट  में  नही  है,  या  कहू  की  वो  जिंदा  बच  गए।  फिर  चाहे  वो  विवेक ओबेरॉय  हो,  कंगना रनौत  हो  या  देओल परिवार  या  फिर  ऐसे  ही  और  भी  है  जो  इनके  अनुसार  नही  चले  और  उन्हें  बाहर  कर  दिया  गया। ये  वो  है  जिनके  मरने  का  हम  इंतज़ार  कर  रहे  है,  क्योंकि  हमें  तो  बहाना  चाहिए  वीडिओज़  बनाने  का  कीचड़  उछालने  और  विरोध  करने  का  जो  कि  कभी  हम  सचमुच  में  करते  ही    नही  है।  क्योंकि  हमने  ही  इन्हें  बढ़ावा  दिया  है  हमने  ही  इन्हें  ये  दिखाया  है  कि  हम  सिर्फ  और  सिर्फ  गरजने  वाले  बादल  है।       

       हम  आज  भले  ही  कितना  भी  च्चिल्ला  ले,  लेकिन  कल  फिर  हम  उठेंगे  और  फिर  उन्हें  ही  मौका  देंगे  अपने  बीच  रहने  का।  अगर  आज  मुझसे  कोई  कहता  है  कि  शुशांत सिंह राजपूत  और  उसके  जैसे  और  जो  मरे  उसके  पीछे  बॉलीवुड  के  माफियाओ  का  हाथ  है  तो  मैं  कहूंगा
गलत  है।  क्योंकि  इसके  जिम्मेदार  हम  और  आप  है।  उन्हें  माफिया  बनाया  किसने  हमने,  उन्हें  इतने  ऊपर  पहुचाया  किसने  हमने,  उनकी  इतनी  हिम्मत  बढ़ाई  किसने  हमने,  क्योंकि  हम  सबकुछ  जानते  हुए  भी  हमेसा  अनजान  बने  रहे।
हम  एक  चैरिटी  के  नाम  पर  5 हत्या  करने  वाले  को  सज़ा  ना  हो  उसके  लिए  भगवान  से  प्रार्थना  करते  है... वो  जो  सिर्फ  उन्हें  मौका  देता  है,  जिन्हें  कुछ  नही  आता  क्योंकि  वो  बड़े  स्टार  के  बच्चे  है  उसकी  कॉफ़ी  पर  खुश  होते  है।  हमे  तो  swag  दिखाने  वाले  अच्छे  लगते  है  मेहनत वाले  कहा  हक़  के  काबिल  होते  है।


अगर  कई  पहलुओ  पर  नजर  डाले  तो  ऐसा  लगता  है,  जैसे  बॉलीवुड  कुछ  ऐसे  धर्म  विशेष  की  मुट्ठी  में  है,  जो  ये  नही  चाहते  कि  छोटी  जगह  और  अपने  दम  पर  अपने  नाम  और  पहचान  के  साथ  कोई  आगे  बढ़  जाये  बिना  उन्हें  गॉडफादर  माने,  बिना  अपने  आपको  उनके  हिसाब  से  बदले।
मुझे  आज  सिर्फ  इतना  ही  कहना  है,  कि  हम  और  आप  अगर  इस  मुद्दे  को  आज  फिर  यूही  बातो  में  गवा  देंगे,  तो  फिर  कोई  शुशांत सिंह  इसी  हालत  में  मिलेगा  और  उसके  जिम्मेदार  हम  ही  होंगे,              अगर  आज  हमे  कुछ  बदलना  है,  तो सबसे  पहले  खुद  को  बदलना  होगा।  हमे  सिर्फ  बहिष्कार  बोलना  ही  नही  है,  हमे  इनका  बहिष्कार  कर  के  दिखाना  होगा,  और  ये  सबक  देना  होगा  कि  हमे  सपने  देखने  वालों  की  कदर  है,  हमे  कदर  है  उनकी  जो  अपनी  अदाकारी  से  अपनी  मेहनत  से  अपनी  जगह  बनाते  है।  हम  उन्हें  अपने  दिलो  में  जगह  देंगे  जो  खुद  को  इनसब  से  दूर  रखकर  सिर्फ  अपने  काम  से  अपने  आपको  साबित  करते  है।  और  अगर  हम  ये  नही  कर  सकते  तो  हमे  किसी  को  बुरा  कहने  का  भी  हक़  नही  है।।






Comments

  1. Excellent. This is really a slap on those faces who say them selves a member of so called bollywood family. Actually this incident is really an irking moment for those viewers or followers who really appreciate talent. And calling this a suicide is cheat for them.

    ReplyDelete

Post a Comment

Popular posts from this blog

Engineering aur pyaar (3)

                            मुलाकात... यू  तो  हर  कोई  हर  किसी  के  लिए  अलग  ही  होता  है  पर  कोई  किसी  का  खास  तब  ही  बनता  है  जब  वो  खास  बनना  चाहता  है । ~~~          अब  सारी  मस्तियों  के  बीच  सर्दियों  ने  दस्तक  दे  दी  थी  और  साथ  ही  सेमेस्टर  भी  हमारे  करीब  आ  गया  था,  और  तैयारी  के  नाम  पर  मैंने  सिर्फ  प्यार  की  कविताएं  ही  लिखी  थी।  अब  जब  भी  पढ़ने  बैठता  तो  दिमाग  के  साथ  कि  गयी  थोड़ी  जोर-जबरजस्ती  काम  आ  जाती  जिससे  कुछ  देर  तो  मैं  पढ़  लेता  पर  थोड़ी  ही  देर  बाद  उसका  चेहरा ,   उसकी  आंखें ,   उसकी  हंसी  सब  जैसे  मेरी  किताबो  में  छप  गया  हो।  अब  ये  समझ  आने  लगा  था  कि  क्यों  हमे  प्यार-मोहब्बक्त  से  दूर  रहने  को  कहा  जाता  है।  कॉपी  पर  सवाल  लगाते  लगाते  कब  पेन  को  उस  कॉपी  पर  घुमाने  लग  जाता  था  कुछ  पता  ही  नही  होता  था।                 तो  अब  मैंने  तय  किया  था  कि  ये  सब  से  ध्यान  हटाना  है ।   वैसे  तो  मुझे  अकेले  पढ़ने  की  आदत  थी ,   पर  अब  मैंने  दोस्तो  के  साथ  पढ़ना  शुरू  कर  दिया।  जैसे-तै

मेरी अनकही कहानी(4)

       वो  आखिरी  पल chapter(4)                       Last chapter               कई  बार  मोहब्बक्त  में  गलतफहमियां  हो  जाती  है,  और  उस  एक  गलतफहमी  का  मुआवजा  हम  पूरी  जिंदगी  भरते  है।...  अक्सर  सफर  और  मंज़िल के  बीच  मे  ही  प्यार  दम  तोड़  देता  है  और  यही  अधूरी  कहानियां  ही  हमारे  सफर  को  खूबसूरत  बनाती  है...  कुछ  ऐसी  ही  अधूरी  कहानी  है  मेरी  जिसे  एक  हसीन  मुकाम  देकर  छोड़  दिया  मैंने  और  आजतक  उस  मोहब्बक्त  को  ना  सही  पर  उस  एक  पल  को  यादकर  जरूर  मुस्कुराता  हूं,  जब  सच  मे  मुझे  एहसास  हुआ  कि  शायद  यही  प्यार  है। प्यार  ढूंढने  में  उतना  वक़्त  नही  लगता  जनाब!  जितना  उसे  समझने  और  समझाने  में  लगता  है।। मैं  बता  रहा  था  कि  अब  हमारी  मुलाकाते  बढ़ने  लगी  थी,  अब  अक्सर  कहू  तो  हम  हर  दूसरे  दिन  मिलते  थे।  खूब  सारी  बाते  होती  थी,  वो  मुझे  अपने  बारे  में  बताती  और  मैं  उसे  उसके  ही  बारे  में  बताता।...                         वो  कहती  कि  बहुत  बोलती  हु  ना  मैं!  मैं  कहता  तुम्हारा  खामोश  रहना  च

Engineering Aur Pyaar (1)

        कॉलेज  का  पहला  दिन... (Chapter-1)                        आज  मेरा  कॉलेज  का  पहला  दिन  था...  हर  कोई  जब  पहले  दिन  कॉलेज  जाता  है  तो  ना  जाने  कितना  उत्साह  अंदर  उमड़ता  रहता  है।  सबकुछ  पाने  की  सबकुछ  देखने  की  और  बहुत  कुछ  करने  की  इच्छाएं  मन  मे  जगह  बनाती  है  और  हम  थोड़ा  डरते  भी  है... और  साथ  ही  ऐसा  लगता  है  जैसे  आसमान  में  हो  क्योंकि  अब  जाकर  पहली  बार  हम  अपने  घर  से  कही  दूर  आये  होते  है...         ऐसा  ही  कुछ  हाल  था  मेरा  आज  वो  पहला  दिन  है  जब  मैं  सच  मे  कुछ  बनने  का  सोचने  की  जगह  कुछ  बनने  की  कोशिश  करने  जा  रहा  था...   और  शायद  ये  मेरी  जिंदगी  का  पहला  ऐसा  कदम  था,  जहाँ  से  अब  सारे  रास्ते  मुझे  खुद  ही  तय  करने  थे। कॉलेज  शुरू  होने  के  2दिन  पहले  ही  मैंने  कमरा  ले  लिया  था,  हम  दो  दोस्त  साथ  ही  आये  थे  लेकिन  उसने  c.s  चुना  और  मैंने  मैकेनिकल ....  वैसे  तो  कॉलेज  में  दाखिले  के  लिए  2...3  बार  आ  चुके  थे।                      लेकिन  वो  पहला  दिन,  जब  कंधे  पर  एक  बैग