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मेरी अनकही कहानी (3)


मोहब्बक्त (chapter-3)


वो  मोहब्बक्त  का  इंतज़ार  भी  बड़ा  कातिल  था।
वो  आंखों  में  बसाकर  जीना  नाकाफी  था।

वो  10  दिन  के  इंतज़ार  या  कहू  की  सारी  उम्मीदो  को  खोने  के  बाद,  वो  एक  hiii... का  मैसेज  कुछ  ऐसा  था, जैसे  मेरे  खयालो  की  पतंग  जिसकी  डोर  मैंने  नाउम्मीद  होकर  जमीन  पर  ला  पटकी  थी,  एक  बार  फिर  वो  आसमान  में  ऊंची  उड़ान  भरने  को  तैयार  था  जैसे  एक  बार  फिर  उसे  उड़ने  के  लिए  बादलो  ने  जगह  दे  दी  थी...  वो  होता  ही  कुछ  ऐसा  है,  हम  लड़के  जब  पहली  बार  किसी  के  खयालो  में  पड़ते  है,  तो  अपनी  ख्वाइशों  को  इतनी  तेजी  से  हवा  देते  है... जैसे  सिर्फ  उसके  देख  लेने  भर  से  ये  सारा  आसमान  हमारा  हो  गया  हो... जैसे  उसके  सिर्फ  बात  कर  लेने  से  हमने  ये  जहां   पा  लिया  हो.. लेकिन  उस  प्यार को  प्यार  कहने  में  बरसों  लग  जाते  है।

तो  अब  आते  है  टॉपिक  पर...  उस  hiii...  के  रिप्लाई  में  लिखने  को  तो  मैं  पूरी  मोहब्बक्त  की  कहानी  लिख  देता,  क्योंकि  बहुत  इंतज़ार  कर  चुका  था  मैं,  लेकिन  फिर  मैंने  खुद  को  रोका  और  उससे  कहा  hllw...    उसका  थोड़ी  देर  में  मैसेज  आया  kaise  ho?...  मैने  रिप्लाई  दिया  thik  hu...   मैंने  भी  उससे  पूछा  tum  kaisi  ho?...  उसने  कहा  thik  hi  hu...  फिर  थोड़ी  देर  तक  दोनों  खामोश  ही  रहे  और  फिर  उसका  मैसेज  आया  kai  dino  se  idhr  dikhayi  nhi  de  rhe  ho  kyu?...         मैंने  उससे  कहा  🙂are  nhi  wo  college  ka  project  work  hai  whi  sb  krne  me  thoda  busy  rhta  hu...  उसने  कहा  thik  hai  sorry  tum  apna  kaam  khtm  kr  lo...      मैंने  पूछा  kuch  baat  krni  hai  kya?...        उसने  कहा  nhi...  मैंने  कहा  ok...  और  बस  messages  बन्द। 
                   
                   अब  मैं  इस  सोच  में  था,  कि  इस  बार  मैं  अपने  खयालो  को  यूही  उड़ने  नही  दूंगा...  उसे  ये  नही  जाहिर  करूँगा,  की  वो  मेरे  लिए  कितनी  जरूरी  है,  और  इस  चक्कर  मे  2  दिन  तक  ना  मैंने  मैसेज  किया  ना  उसने  पर  अब  मुझे  बुरा  लग  रहा  था,  कि  मैं  कुछ  ज्यादा  ही  भाव  खाने  की  कोशिश  में  हु।  यही  सोचकर  मैंने  उसे  मैसेज  करने  के  लिए  उसकी  id  खोली  और  देखा,  कि  आज  तो  उसका  बर्थडे  है,  तो  मैंने  खुद  को  रोक  लिया।  मैंने  सोचा  कि  आज  के  दिन  उसे  मैसेज  करना  सही  नही  होगा,  जेब  में  पैसे  वगैरह  नही  है  और  तभी,  उसका  मैसेज  आया  Hiii...  फिर  थोड़ी  देर  के  बाद  अगला  मैसेज  आया  Free  hona  to  shaam  me  6 o'clock  aa  jaana  mere  b'day  ki  choti  si  party  hai...        मैंने  पढ़  तो  लिया  लेकिन  कुछ  भी  रिप्लाई  नही  दिया,  और  फोन  को  जेब  मे  रखकर  दोस्तो  से  बाते  करने  लगा।  उन  सबने  मेरा  मुँह  देख  के  पूछा  क्या  हो  गया  बे... मैंने  उन्हें  बताया  कि  यार  आज  उसका  बर्थडे  है  और,  उसने  पार्टी  में  बुलाया  है,  लेकिन  यार  अभी  तो  पैसे  भी  नही  है  कैसे  जाऊंगा? ...  और  सबने  थोड़े  थोड़े  पैसे  अपने  पास  से  दिए  और  जाने  को  कहा।    

                   अब  मैंने  सोच  लिया  था,  कि  मैं  उसके  पहुचने  से  पहले  ही  वहां  पहुच  जाऊंगा,  पर  मिलूंगा  तब  जब  वो  वहां  से  जाने  लगेगी।  मैंने  ऐसा  ही  किया  मैं  5:30  से  पहले  ही  वहाँ  पहुच गया  और  एक  जगह  ऐसी  ले  ली,  जहा  से  मैं  उसे  लगातार  देख  सकू,  लेकिन  उससे  छिपा  रहू  और  जब  वो  आयी  तो  क्या  लिखूं  की  वो  कैसी  लग  रही  थी,  बस  इतना  ही  कहूंगा  कि...     उन  आंखों  के  बीच  उसके  माथे  पर  लगी  वो  बिंदी  उफ्फ...  मैं  तो  बस  वही  रुक  गया  था।

वो  माथे  की  बिंदी,  वो  चेहरे  की  रौनक...
वो  आंखों  का  काजल,  वो  होठो  की  लाली...
वो  मुस्कुरा  के  पलके  गिराना,  वो  जुल्फों  का  गालो  पर  आना...

वो  हर  उस  शायर  की  कल्पनाओ  सी  लग  रही  थी,  जो  अपनी  हर  शायरी  में  खूबसूरती  को  तराशते  है  और  उसे  देख  कर  बस  यही  ख्याल  आ  रहा  था,  की  इस  मूरत  को  तराशने  में  जरूर  ऊपर  वाले  ने  एक  अलग  से  साँचा  बनाया  होगा। 


ऐसे  ही  खयालो  में  रहते  हुए  काफी  देर  के  बाद  देखा  वो  सब  वहां  से  जा  रहे  है।  उसके  बाहर  निककर  सबसे  अलग  होते  ही,  मैं  उससे  मिला  और  कहा-.              happy  birthday  miss...  उसने  उखड़ा  हुआ  मुँह  बनाकर  नजर  फेर  ली...  मैंने  फिर  कहा-       sorry,  for  the  late  but  मुझे  लगा  कि  मैं  सबसे  पहले  तो  बर्थडे  विश  कर  नही  पाया,  क्यों  न  सबसे  आखिरी  में  बोलू, वैसे  भी  पहला  तो  कोई  भी  बन  सकता  है,  पर  एक  लंबे  इंतजार  के  बाद  जो  मीले  और  वही  आखिरी  बन  जाये  फिर  चाहे  वो  दोस्त  हो  या  हमसफर।  
   
                वो  फिर  भी  गुस्से  में  थी  और  उसने  कहा-  मुझे  तुमसे  बात  नही  करनी  है।  और  जाने  लगी  मैंने  उसके  आगे  आकर  उसे  रोका  और  मुस्कुराकर  अपनी  जेब  से  चॉक्लेट  निकाल  कर  उसकी  तरफ  बढाते  हुए  कहा-  सुना  है  इसे  खाने  से  नाराजगी  दूर  हो  जाती  है।...     इस  बार  उसने  छोटी  मुस्कान  लेकिन  गुस्से  में  मेरी  तरफ  देखा  और  मैंने  फिर  कहा-  वो  टी.वी  में  ad  देखा  था  इस  चॉक्लेट  का।...    और  इस  बार  वो  फिर  पहले  की  तरह  मुस्कुराई  मेरी  बातों  पर  और  वो  चॉक्लेट  ले  लिया...  
                तब  मैंने  उससे  कहा-  चलो  तुम्हारे  बर्थडे  के  नाम  एक  कॉफ़ी  पीते  है  मेरी  तरफ  से  क्योंकि  और  कुछ  तो  मैं  लाया  नही  हु,  तब  उसने  कहा-  नही  बहुत  लेट  हो  गया  है,  तुम  आ  गए  वही  बहुत  है  और  कल  मिलते  है,  same  time  same  place...  और  चॉक्लेट  के  लिए  thanks...  मैंने  जिद्द  भी  नही  की  उसे  रोकने  की  और  कहा  कहो  तो  घर  छोड़  दु,  उसने  कहा  नही  कल  कॉफ़ी  पिलाना  और  घर  भी  कल  ही  छोड़ना।...  और  मुस्कुराते  हुए  वहा  से  चली  गयी  लेकिन  मैं  वही  खड़ा  रहा  और  सोचता  रहा  कि  वो  पल  कब  आएगा  जब  उसके  पलट  के  देखने  का  इंतज़ार  खत्म  होगा।...  और  उसी  पल  से  उस  अगले  पल  का  इंतज़ार  भी  करने  लगा  की  अगली  शाम  वो  एक  बार  फिर  मेरे  सामने  बैठी  होगी।

उस  शाम  हम  मिले  ढेर  सारी  बाते  की  उसने  मुझे  बताया  कि  इतनी  जल्दी  इतने  करीब  पहुचने  वाला  मैं  पहला  इंसान  हु,  क्योंकि  वो  बहुत  कम  लोगो  से  मिलती  है  और  उनमें  से  कुछ  ही  होते  है  जिनके  साथ  वो  रहना  चाहती  है,  उनमे  से  एक  मैं  भी  बन  गया  था  उसके  लिए।... 
                     उसके  बाद  मुलाकाते  बढ़ती  गयी,  बाते  बढ़ती  गयी  और  हमारा  रिश्ता  एक  अलग  ही  मोड़  पर  पहुच  रहा  था...  और  फिर...


To  be  Continued...


वो  एक  पल... (Chapter-4)

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