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मेरी अनकही कहानी(4)


  
    वो  आखिरी  पल chapter(4)  
                   Last chapter

              कई  बार  मोहब्बक्त  में  गलतफहमियां  हो  जाती  है,  और  उस  एक  गलतफहमी  का  मुआवजा  हम  पूरी  जिंदगी  भरते  है।...  अक्सर  सफर  और  मंज़िल के  बीच  मे  ही  प्यार  दम  तोड़  देता  है  और  यही  अधूरी  कहानियां  ही  हमारे  सफर  को  खूबसूरत  बनाती  है...  कुछ  ऐसी  ही  अधूरी  कहानी  है  मेरी  जिसे  एक  हसीन  मुकाम  देकर  छोड़  दिया  मैंने  और  आजतक  उस  मोहब्बक्त  को  ना  सही  पर  उस  एक  पल  को  यादकर  जरूर  मुस्कुराता  हूं,  जब  सच  मे  मुझे  एहसास  हुआ  कि  शायद  यही  प्यार  है।

प्यार  ढूंढने  में  उतना  वक़्त  नही  लगता  जनाब! 
जितना  उसे  समझने  और  समझाने  में  लगता  है।।

मैं  बता  रहा  था  कि  अब  हमारी  मुलाकाते  बढ़ने  लगी  थी,  अब  अक्सर  कहू  तो  हम  हर  दूसरे  दिन  मिलते  थे।  खूब  सारी  बाते  होती  थी,  वो  मुझे  अपने  बारे  में  बताती  और  मैं  उसे  उसके  ही  बारे  में  बताता।...
                        वो  कहती  कि  बहुत  बोलती  हु  ना  मैं!  मैं  कहता  तुम्हारा  खामोश  रहना  चुभता  है  मुझे।...  वो  कहती  कि  बहुत  अच्छे  हो  तुम,  और  मैं  कहता  की  तुम्हारी  आंखे  बहुत  खूबसूरत  है। 

          ऐसे  ही  बाते  और  मुलाकाते  बढ़ती  गयी  और  जो  कहानी  उसकी  पसन्द  की  कॉफ़ी  मेरे  पीने  से  शुरू  हुई  थी,  वो  अब  मेरी  चाय  उसको  पसन्द  आने  तक  पहुँच  चुकी  थी।।                    
                             तो  अब  मुझे  ऐसा  महसूस  होने  लगा  कि  ये  जो  कुछ  शब्दों  के  फासले  बचे  है  हमदोनो  के  बीच  क्यों ना  इन्हें  खत्म  कर  दिया  जाए...  क्यों  ना  मैं  उसे  बता  दु  की  जैसे  इस  आसमान  के  लिए  चाँद,  सितारे  जरूरी  है,  वैसे  ही  मेरे  लिए  तुम  हो।  क्यों  ना  मैं  उसे  कह  दु  की  उसका  हाथ  पकड़  मैं  अपनी  पूरी  जिंदगी  बिताना  चाहता  हू।  मैं  चाहता  हु  की  वो  अक्सर  जब  रुठ  जाए  तो  उसे  मनाने  के  मैं  सौ  बहाने  बनाऊ।


          मैंने  सोच  लिया  कि  आने  वाली  होली  पर मैं  उसे  अपने  प्यार  का  रंग  लगाऊंगा  और  यही  सोचकर  इस  होली  पहली  बार  मैं  अपने  घर  नही  गया।
                आज  वो  दिन  या  कहू  शाम  है  जिस  शाम  का  इंतज़ार  मैं  कई  महीनों  से  कर  रहा  था।...  ये  ना  जाने  कैसी  हलचल  मची  थी  जिसमे  दिमाग  मे  शोर  तो  बहुत  था  पर  दिल  मे  सुकून  उससे  ज्यादा...  सुकून  इस  बात  का,  की  आज  आखिरकार  मैं  उससे  प्यार  का  इज़हार  करूँगा  और  यही  सोचते  सोचते  मैं  मिलने  वाली  जगह  पर  पहुँचा।  जब  मैंने  उसे  वहाँ  देखा  तो  मैं  उसे  देखता  ही  रह  गया,  वो  रोज़  से  ज्यादा  खूबसूरत  लग  रही  थी  उसके  गालो  पर  लगे  रंग  जैसे  उसे  मोह  रहे  हो।  मैं  आगे  बढ़ा  दिल  मे  अजीब  तरंगे  उठ  रही  थी,  ऐसा  लग  रहा  था  जैसे  मैं  पहली  बार  उससे  बात  करने  जा  रहा  हू। 


                 मैं  उसके  करीब  पहुचता  उससे  पहले  देखा  वो  किसी  से  बात  कर  रही  थी,  मैं  रुका  देखा  की  वो  लड़का  उसपर  गुस्सा  कर  रहा  था,  शायद  वो  दोनों  झगड़  रहे  थे।  तभी  उस  लड़के  ने  अपना  हाथ  उससे  छुड़ाया  और  वहाँ  से  जाने  लगा  और  जैसे  उसका  जाना  उसे  अच्छा  ना  लगा  हो,  इसलिए  वो  भी  उसके  पीछे-पीछे  वहाँ  से  चली  गयी।
                            वो  उसे  बुलाती  मगर  वो  रुक  नही  रहा  था,  तब  मैंने  खुद  को  संभाला  और  वो  एक  गुलाब  जो  मेरे  हाथों  में  था,  उसे  लिए  मैं  वही  घण्टों  खड़ा  रहा  इस  इंतज़ार  में  की  कही  वो  आयी  और  मैं  नही  मिला  तो  उसे  अच्छा  नही  लगेगा,  पर  शायद  तबतक  बहुत  देर  हो  चुकी  थी।    
 
             
                           3दिन  बाद  उसने  मुझे  कॉल  किया,  मैं  उससे  कुछ  पूछता  उससे  पहले  ही  उसने  मिलने  को  कहा।  हमेशा  की  तरह  उसी  जगह  उसी  वक़्त  हम  मिलें।                               इतने  दिनों  में  पहली  बार  था,  जब  वो  मुझसे  आंखे  नही  मिला  रही  थी  और  मैं  कुछ  बोलता  उससे  पहले  ही  उसने  बताया  कि  उस  लड़के  से  ही  उसकी  शादी  होने  वाली  है,  ये  वो  लड़का  है  जिससे  उसके  स्वर्गीय पिता  ने  उसकी  शादी  तय  की  थी।          
      
                  मुझे  नही  पता  उस  वक़्त  मेरे  अंदर  क्या  चल  रहा  था,  मैं  जैसे  सुन्न  पड़  गया  था।  उसने  उसके  बारे  में  सबकुछ  बताया  और  ये  भी  की  उसे  किसी  ने  हमदोनो  के  बारे  में  बताया  है,  इसलिए  वो  उससे  नाराज़  है।...            मैंने  कहा  तुमने  बताया  नही  कभी,  वो  बोली  कि  पता  नही  यार  तुम  होते  थे  साथ  तो  मुझे  कोई  और  खयाल  ही  नही  आता  था।  तुम्हारे  साथ  ऐसा  लगता  था  जैसे  मुझे  कोई  और  चाहिए  ही  नही।  मैं  खुद  को  बहुत  लकी  मानने  लगी  थी।               
                  मुझे  याद  सब  था  पर  मैं  सिर्फ  तुम्हे  याद  रखना  चाहती  थी...  पर  ये  भूल  गयी  कि  वो  शख्श  जो  मेरे  लिए  सबसे  खास  थे,  उन्होंने  मेरे  लिए  किसी  और  को  चुना  था।  शायद  मैं  इस  चुनाव  को  गलत  ठहरा  सकती  अगर  वो  जिंदा  होते,  पर  वो  नही  है।  फिर  वो  मुस्कराते  हुए  बोली  कि  पता  नही  क्या  हुआ  और  कब  हुआ  पर  जैसे  कोई  बेवफाई  की  सज़ा  भुगतता  है,  जैसे  कोई  धोखे  की  सज़ा  भुगतता  है,  वैसे  ही  मुझे  तुम्हे  चाहने  की  सज़ा  भुगतनी  होगी,  वो  भी  जिंदगी  भर।  उसने  कहा  मैं  उसे  तो  मना  लूंगी  पर  इस  दिल  का  क्या  करूँ  जिसने  सिर्फ  तुम्हे  चुन  रखा  है। 
 
                   उसके  इतना  सब  बोलने  के  बाद  मेरे  लिए  हालात  ऐसे  थे,  जैसे  मुझे  पूरा  आसमान  मिल  गया  हो,  पर  किसी  ने  उस  आसमान  से  चाँद,  तारे,  पंछी  सब  छिन  लिए  हो।  जैसे  दो  नदिया  मिलने  के  बाद  भी  अलग  दिशाओ  में  बह  रही  हो।    मैंने  भी  अपनी  चुप्पी  तोड़ी  और  उससे  कहा  की  हो  सकता  है  की  मैंने  तुम्हें  इतने  दिनों  में  स्पेशल  फील  कराया  हो,  पर  कही  न  कही  उसमे  मैंने  अपना  फायदा  देखा  था...   पर  वो  लड़का  जो  आज  के  समय  मे  भी  अपने  पिता  के  तय  किये  हुए  रिश्ते  को  अहमियत  दे  रहा  है,  जो  अपने  माँ-बाप  को  इतना  मानता  हो  वो  तुम्हारा  कितना  ख्याल  रखेगा।  मैं  उसे  सही  नही  ठहरा  रहा  हु  और  न  ही  तुम  पर  अपना  फैसला  थोप  रहा  हु।  बस  ये  कहना  है  कि  हो  सकता  है,  मैंने  कुछ  दिनों  में  ही  तुम्हारे  दिल  मे  जगह  बना  ली  है,  पर  जरूरी  नही  ये  प्यार  ये  लगाव  हमेशा  ऐसा  ही  रहेगा...   हो  सकता  है  कि  जो  मुझे  पहली  नजर  का  प्यार  लग  रहा  है,  वो  तुम्हारी  खूबसूरती  को  देख  मेरा  खिंचाव  हो  जो  किसी  भी  लड़के  को  तुम्हे  देखकर  हो  सकता  है। 

मुझे  नही  है  खुद  पर  भरोसा  की  मैं  तुम्हारे  साथ  इस  रिश्ते  को  किस  मुकाम  तक  ले  जा  पाऊंगा...  इस  रिश्ते  को  कोई  पहचान  कोई  नाम  मैं  दे  पाऊंगा  या  नही,  मैं  नही  जानता।  पर  वो  लड़का  जो  तुम्हारे  कहने  के  हिसाब  से  पिछले  4  सालों  से  सिर्फ  तुम्हारा  इंतज़ार  कर  रहा  है,  जो  तुम्हारे  कहने  पर  इतने  सालों  से  तुमसे  दूर  रह  रहा  है,  जो  तुमपर  खुद  से  ज्यादा  भरोसा  करता  है,  ऐसे  लड़के  को  तुम  गलत  नही  कह  सकती।  गलत  तो  मैं  हु  क्योंकि  मैं  बीच  मे  आया  हु,  वो  तो  पहले  से  है।
                वैसे  भी  यार  ये  4दिन  वाला  प्यार  तुम्हारे  उस  4साल  के  भरोसे  और  तुम्हारे  पापा  के  45साल  के  अनुभव  से  कभी  जीत  नही  सकता।  हो  सकता  है  कि  मैं  तुम्हे  छोड़  भी  दु  पर  मुझे  भरोसा  है  की  वो  पूरी  जिंदगी  तुम्हारा  साथ  देगा   तुम्हे  बहुत  खुश  रखेगा।  मैं  तुम्हारी  जिंदगी  का  फैसला  नही  कर  रहा  हू,  मैं  बस  तुम्हे  सोचने  का  मौका  दे  रहा  हू।  मैं  उस  लड़के  को  जानता  तो  नही  हु  पर  तुम  जानती  हो  और  उतना  जानती  हो  जितना  मेरे  बारे  में  जानने  में  तुमको  अभी  बहुत  समय  लग  जायेगा।

सोचो  और  फैसला  करो  कि  जो  तुमसे  प्यार  करता  है  तुम्हे  उसके  साथ  रहना  है  या  जिससे  तुम  प्यार  करती  हो  उसके  साथ।  क्योंकि  जिससे  हम  प्यार  करते  है  हो  सकता  है,  वो  हमें  छोड़  दे  पर  जो  हमसे  प्यार  करता  है  वो  हमे  कभी  नही  छोड़ता  है।   मैं  भगवान  से  यही  मागूँगा  की  तुम  सही  फैसला  लो  और  जब  भी  मेरी  जरूरत  हो  मुझे  कॉल  कर  लेना।  यही  कहकर  मैं  वहाँ  से  चला  आया।

            3साल  के  बाद  मैंने  जब  उसे  उस  लड़के  के  साथ  फिर  देखा  तब  मुझे  समझ  आया  कि  मेरा  फैसला  सही  था।   वही  वो  आखिरी  पल  था  जब  ये  समझ  आया  कि  अगर  उसकी  ख्वाइशों  को  पूरा  करना  प्यार  है,  तो  उसे  खुश  देखना  भी  प्यार  है...  फिर  चाहे  उसकी  वो  खुशी  किसी  और  के  साथ  ही  क्यों  ना  हो।

मैं  उम्मीद  करता  हु  आपको  ये  कहानी  पसन्द  आयी  होगी।  कृपया  अपने  सुझाव  comment  section.  में  अवश्य  दे🙏।

Comments

  1. Strong relationship start with two people Who are ready sacrifice anything for each other that’s called true love story In Your stories you simply said, may Be you regret the way you ended, But when you saw him happy after 3 years, you would not regret it. You did very well!

    Seeing your sacrifice, I feel like saluting you, my brother, you ended your love story very good way

    I hope this is a story only 😊 becoz I don’t want to see you in depression brother

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    1. This is more than the story, but it gives me happiness, not depression.
      I thank you that you liked this story...

      Yes sacrifice is true love... And what can be more important than the happiness of someone we love..

      Delete
  2. I don't like the end ....love is not about always break apart ,always doing a sacrifice..but sometimes fight for each other, wants to live together forever no matter what the situation is.....maybe you are right in your stories but i like happy endings.....

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    Replies
    1. Sure I can't justify everyone, maybe you have a different view of things
      But this is not the story of a film, this is what happens in real life
      Sacrifice has to be done everywhere, whether it is in the way or time

      But I'll try that you like my next love story... 🙂

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  3. Really heart touching story,😘😘

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    1. Kya baat h thank u for review... Dil ko lgi mtlb tumne feel kiya h.. mere likhne se jyada aapka feel krna mere liye jruri h...

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  4. Kya likhte hai gajab 😍😱😘😘

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  5. Replies
    1. Thankss for your review... This will always help me to write my best🤗

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