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Engineering aur pyaar (3)



                           मुलाकात...


यू  तो  हर  कोई  हर  किसी  के  लिए  अलग  ही  होता  है  पर  कोई  किसी  का  खास  तब  ही  बनता  है  जब  वो  खास  बनना  चाहता  है ।


~~~

         अब  सारी  मस्तियों  के  बीच  सर्दियों  ने  दस्तक  दे  दी  थी  और  साथ  ही  सेमेस्टर  भी  हमारे  करीब  आ  गया  था,  और  तैयारी  के  नाम  पर  मैंने  सिर्फ  प्यार  की  कविताएं  ही  लिखी  थी।  अब  जब  भी  पढ़ने  बैठता  तो  दिमाग  के  साथ  कि  गयी  थोड़ी  जोर-जबरजस्ती  काम  आ  जाती  जिससे  कुछ  देर  तो  मैं  पढ़  लेता  पर  थोड़ी  ही  देर  बाद  उसका  चेहरा,  उसकी  आंखें,  उसकी  हंसी  सब  जैसे  मेरी  किताबो  में  छप  गया  हो।  अब  ये  समझ  आने  लगा  था  कि  क्यों  हमे  प्यार-मोहब्बक्त  से  दूर  रहने  को  कहा  जाता  है।  कॉपी  पर  सवाल  लगाते  लगाते  कब  पेन  को  उस  कॉपी  पर  घुमाने  लग  जाता  था  कुछ  पता  ही  नही  होता  था। 


               तो  अब  मैंने  तय  किया  था  कि  ये  सब  से  ध्यान  हटाना  है  वैसे  तो  मुझे  अकेले  पढ़ने  की  आदत  थी,  पर  अब  मैंने  दोस्तो  के  साथ  पढ़ना  शुरू  कर  दिया।  जैसे-तैसे  पहला  सेमेस्टर  खत्म  हुआ,  और  सर्दी  की  छुट्टीया  शुरू  हो  गयी...


~~~
                    कुछ  दिनों  की  छुट्टियों  के  बाद  फिर  से  कॉलेज  खुल  गया।  पर  अब  कुछ  भी  पहले  जैसा  नही  था,  अब  कॉलेज  में  ज्यादातर  लोग  मुझे  जानते  थे  और  कइयों  से  मेरी  दोस्ती  भी  हो  गयी  थी।  अब  हुआ  कुछ  यूं  कि  कॉलेज  खुले  4,5  दिन  ही  हुए  थे  की  एक  बन्दा  मेरे  पास  आया  और  मुझसे  कहा  "यार  एक  बर्थडे  पार्टी  है  और  हमसब  चाहते  है  कि  तुम  उस  दिन  एक  सरप्राइज  परफॉरमेंस  दो  क्योंकि  जिसका  जन्मदिन  है  उसे  तुम्हारी  उस  दिन  की  परफॉरमेंस  बहुत  पसंद  आई  थी।"       

                  चुकी  वो  सीनियर  था  तो  मैंने  हाँ  कह  दिया... मैंने  तो  उससे  ये  भी  नही  पूछा  कि  बर्थडे  किसका  है?  बस  उसने  कहा  परसो  यानी  23जनवरी  को  शाम  6 बजे  तक  आ  जाना।  फिर  मुझे  ख्याल  आया  कि  सीनियर्स  की  पार्टी  है  तो  शायद  वो  भी  आये  यही  सोचकर  मैंने  एक  कहानी  तैयार  की... 
    क्योंकि  सर्दी  उस  वक़्त  भी  बहुत  थी  तो  मैं  अपनी  कहानी  और  उसे  वहां  देखने  के  एहसास  की  गर्मी  लेकर  वहां  पहुचा।  वहां  पहुचकर  मुझे  पता  लगा  कि  जिसे  मैं  यहां  ढूंढने  आया  था  उसी  ने  मुझे  उस  पार्टी  में  बुलाया  है...  आज  उसका  ही  जन्मदिन  है।  

            अभी  मैं  सबसे  मिल  ही  रहा  था  कि  अचानक  ही  वो  वहां  आ  गयी  मैं  थोड़ा  पीछे  खड़ा  था  पर  ऐसा  लगा  जैसे  उसकी  आंखें  मेरी  तलाश  में  है  और  तभी  उसकी  नजरे  मुझसे  लगभग  10सेकंड  के  लिए  टकराई  होंगी  और  उस  10सेकंड  में  उसकी  आँखों  ने  मुझसे  जैसे  लाखो  सवाल  कर  लिए  हो  ऐसा  महसूस  हुआ  जैसे  वो  मेरे  इंतज़ार  में  थी,  और  उसकी  खूबसूरती  के  बारे  में  मैं  क्या  ही  कहूं?  मैंने  पहले  ही  काफी  कुछ  लिखा  है।
उसे  देखकर  आज  बस  यही  ख्याल  चल  रहा  था की...
~~~


मेरे  इस  दिमाग  की  उठा-पटक  के  बीच  उसने  अपने  जन्मदिन  का  केक  काटा  हालांकि  छोटे  शहर  से  आये  हुए  मेरे  लिए  ये  सब  नया  था।  ये  सब  होने  के  बाद  सभी  ने  माइक  पर  उसके  लिए  कुछ  न  कुछ  कहा,  किसी  ने  तारीफ  की  किसी  ने  शिकायत  और  आखिर  में  मुझे  बुलाया  गया। 
                  मैंने  माइक  हाथ  मे  लेते  हुए  कहा   माफ  करियेगा  मुझे  पता  नही  था  कि  किसका  जन्मदिन  है,  नही  तो  मैं  भी  थोड़ी  तारीफे  साथ  लाता  फिर  भी  2 लाइनें  कहूंगा...

तेरी  जुल्फों  से  निकलकर  तेरे  झुमके  पर  ठहर  जाता  हूं!
तेरी  गिरफ्त  से  जो  निकलू  तब  तो  कोई  काम  हो।


सबकी  तारीफों  के  बीच  मैंने  फिर  कहा  कि  आज  मै  आपसब  के  सामने  एक  साधारण  से  लड़के  की  उस  उलझन  के  बारे  में  बताऊंगा  की  कैसे  जब  वो  एक  खूबसूरत  लड़की  को  पहली  नजर  देखते  ही  उसके  प्यार  में  तो  पड़  जाता  है,  लेकिन  बात  जब  इज़हार  की  आती  है  तब  उसे  डर  किस  बात  से  लगता  है!
वो  सोचता  है...


वो  नदी  का  किनारा  है,  तो  मैं  गुमनाम  सी  लहर  हू
वो  आसमान  का  खूबसरत  सा  चाँद  है,  तो  मैं  अंधेरा  ग्रहण  हू
वो  दिए  सा  रौशनी  फैलाता  है,  तो  मैं  जुगनू  सा  भटकता  हू
वो  फूलों  सा  खुशबू  बिखेरता  है,  तो  मैं  काटो  सा  चुभता  हू
वो  जो  खुद  तो  ताजमहल  है  और  मैं  आगरा  भी  नही
वो  जो  गंगा  सी  निर्मल  है  और  मैं  उसमे  मिल  सकू  ऐसी  धारा  भी  नही
वो  ऐसी  है  जिससे  मैं  मिल  तो  नही  सकता  पर  आरज़ू  करता  हू
वो  ऐसी  है  जिसे  मैं  देख  भी  नही  सकता  पर  दीदार  को  तरसता  हू
वो  ताजमहल  है,  वो  रौशनी,  वो  किनारा,  वही  फूलों  की  खुशबू
मैं  कौन  हूं!  जो  उससे  बस  एक  मुलाकात  की  ख्वाइश  रखता  हू
मैं  कौन  हूं!  जो  गुमनाम  सा  उसके  इंतज़ार  को  भटकता  हू
            वो  गंगा  है!  वही  चाँद  है!
मैं  कौन  हूं!...  मैं  कौन  हूं!                              

                            इस  अध्याय  को  थोड़ा  सा  अधूरा  छोड़  रहा  हू,  अभी  उस  रात  की  कहानी  अधूरी  है,  जो  आपको  अगले  अध्याय  में  पढ़ने  को  मिलेगी...


        Chapter - 4
                                नखरा !...




Comments

  1. Bhai tu apna hero hai....bas sahi time ka wait kr...

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  2. Aap whi hero ho bhut hi sunder

    ReplyDelete
    Replies
    1. Dhnywad... 😍💕
      kisi ne to hme phchana pr hero bnne me abi thoda wqt lgega... Wait krte h next chapter ka..

      Delete
  3. Tagda hai bhai lg rha h koi mast nobel pdh rha hu ...Laga rah bhai bs book ka intjar hai jaldi se nikal

    ReplyDelete
    Replies
    1. Bss bhai aap sbne apna pyaar bnaye rkhiye... Jldi hi mumkin hoga..

      Delete

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