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Engineering aur pyaar (6)

 


Chapter-6    
                   हसीन मोड़


           जीवन  मे  कितनी  ही  बार  अच्छे  वक्त  की  पहचान  उस  वक़्त  के  बीत  जाने  के  बाद  होती  है  लेकिन  बुरा  वक्त  शुरुवात  से  ही  अपने  होने  की  दस्तक  हमारे  कानो  तक  पहुचा  देता  है।  शायद  इसलिए  हम  अच्छे  और  बुरे  वक्त  को  उसकी  पहचान  के  हिसाब  से  जीते  है  और  हर  बार  अच्छे  वक़्त  की  उम्र  छोटी  होती  है  हमारे  लिए  क्योंकि  उसको  पहचानने  में  ही  हम  आधे  से  ज्यादा  वक़्त  को  गवा  चुके  होते  है।  शायद  इसलिए  ही  हर  बार  हमें  अपने  दुखों  का  पड़ला  भारी  लगता  है  सुख  के  तराजू  से।।


     कॉलेज  में  मेरे  दो  साल  खत्म  हो  चुके  थे  और  कॉलेज  के  पहले  दिन  से  लेकर  आजतक  में  काफी  कुछ  बदल  चुका  था।  वो  लड़का  जो  अपनी  बातों  को  किसी  से  बताने  की  जगह  अपनी  डायरी  के  पन्नो  को  भरता  था  वो  अब  उन्ही  बातों  को  किस्सों  कहानियों  में  पिरोकर  सभी  को  बेहिचक  सुनाता  है,  वो  लड़का  जो  लड़कियों  से  बात  करने  में  हिचकिचाता  था  अब  वो  एक  लड़की  को  अपने  दिल  का  हाल  सुनाने  लगा  है।...  यहां  आकर  मैंने  कितने  ही  ऐसे  भी  रिस्ते  जोड़  लिए  है  जो   मेरी  अच्छी  बुरी  आदतों  के  साथ  मेरी  बोरिंग  सी  कहानियों  को  सुनकर  तालिया  पीटने  के  लिए  और  शायद  पूरी  उम्र  साथ  चलने  के  लिए  तैयार  है(मेरे दोस्त)।


खींचतान  के  इन  2सालो  में  69 से 70%  तक  पास  हो  रहे  है।  ये  साल  थोड़ा  ज्यादा  भारी  होने  वाला  था  क्योंकि  एक  तरफ  पढाई  और  दूसरी  तरफ  नई  नई  शुरू  हुई  मोहब्बक्त  की  बिदाई  का  समय  भी  नज़दीक  था,  उसका  आखिरी  साल  था  ये।  पर  फिलहाल  मन  की  रफ्तार  से  चलते  इस  वक़्त  को  उसके  साथ  रहकर  थोड़ी  देर  रोकना  चाहता  हू  मैं...  मैं  उसके  साथ  हर  एक  लम्हे  हर  एक  पल  को  खुलकर  जीना  चाहता  हू  उसके  साथ  घूमना  चाहता  हू।  उसकी  बाहों  में  अपना  सिर  रखकर  उसके  चेहरे   को  देखते  हुए  अनगिनत  कहानियां  लिखना  चाहता  हू...  उसकी  आँखों  मे  झांकते  हुए  घण्टो  बिताना  चाहता  हू।  उसके  जाने  की  ज़िद  पर  उसे  रोकना  चाहता  हू।  उसके  देर  से  आने  पर  उसे  डांटना  भी  चाहता  हू।  ऐसे  ही  कितना  कुछ  है  जो  इस  1 साल  में  जीना  चाहता  हू  मैं।


         ये  सब  उसे  बताने  पर  हमने  तय  किया  हम  रोज़  1घण्टे  साथ  बिताएंगे,  उसने  भी  अच्छी  खासी  लिस्ट  बना  रखी  थी  साथ  घूमने  की  साथ  खाने  की  साथ  बैठने  की।  उस  वक़्त  कॉलेज  के  बाद  का  1घण्टा  सपनो  की  तरह  जीते  थे  हम।  हमदोनो  को  ही  पता  था  कि  कॉलेज  खत्म  होने  के  बाद  जब  जॉब  शुरू  हो  जाएगी  तो  कौन  कहा  कैसे  रहेगा  कुछ  पता  नही  तो  हम  अभी  कुछ  ज्यादा  जी  लेते  है  साथ  मे।...

हमारे  साथ  को  अब  लगभग  1साल  होने  को  थे  और  उसके  कॉलेज  खत्म  होने  में  अब  1साल  से  भी  कम  वक्त  बचा  था...
        उसी  दौरान  एक  रोज़  ना  जाने  क्यों  वो  बहुत  उदास  सी  थी,  वजह  पूछने  पर  उसने  बहाने  बनाने  शुरू  कर  दिए...  फिर  थोड़ा  ज़ोर  देने  पर  उसने  मुझसे  कहा  कि  जिस  रास्ते  पर  हम  है  वो  किसी  मंज़िल  तक  जाती  है  क्या??? 
मैं  पहले  थोड़ा  सोच  में  पड़ा  फिर  उससे  कहा  हर  बार  मंज़िल  के  लिए  रास्ते  नही  चुने  जाते  है  कई  बार  सिर्फ  सफर  के  लिए  लोग  चलते  है  रास्तो  पर... 
उसने  कहा  फिर  तो  जब  किसी  रास्ते  पर  चलकर  हमे  पता  हो  कि  दुख  ही  मिलेगा  तो  हम  क्यों  चल  रहे  है  उस  रास्ते  पर...
मैं  मुस्कुरा  के  बोला  प्यार  ना  मिलने  की  बात  कर  रही  हो  न...
उसने  सर  हिलाकर  हामी  भरी,
मैंने  कहा  अगर  देखा  जाए  तो  जीवन  के  मिलने  की  समझ  के  साथ  ही  हर  किसी  को  मालूम  होता  है  कि  किसी  भी  पल  किसी  भी  दिन  मरना  है  लेकिन  फिर  भी  हम  जीते  है,  वैसे  ही  दुख  के  डर  से  अगर  सुख  को  नजरअंदाज  किया  जाए  तो  कैसे  सही  हो  सकता  है।
उसने  मुझसे  फिर  कहा  कि  तुम  इतने  सही  कैसे  हो  सकते  हो  तुम्हे  मालूम  होना  चाहिए  कि  खुशिया  भले  ही  4दिन  की  क्यों  न  हो  लेकिन  1दिन  का  दुख उस  पर  भारी  पड़ता  है।
मैंने  उससे  मुस्कुराते  हुए  कहा  कि  मैं  बिल्कुल  भी  सही  नही  हु  मुझपर  भी  खुशी  हो  या  गम  दोनों  का  प्रभाव  उतना  ही  पड़ता  है  जितना  सभी  पर,  बस  मैं  कोशिश  करता  हू  की  खुशी  भले  कुछ  वक्त  की  हो  लेकिन  उसे  पूरी  तरह  जीना  चाहता  हू  और  गम,  गम  तो  हमारे  उन  सब्जेक्ट्स  की  तरह  है  जिनकी  जरूरत  नही  होती  है  फिर  भी  जरूरी  होते  है।

यही  समस्या  है  यार  तुम  हमेसा  अपनी  बातों  में  मुझे  उलझा  देते  हो,  मैंने  तुमसे  बाते  भी  कर  ली  और  मेरा  सवाल  अभीतक  सवाल  ही  बना  हुआ  है, 
मैं  जोर  से  हँसा  और  उससे  कहा  कुछ  सवालों  को  सवाल  ही  रहने  देना  चाहिए  क्योंकि  कुछ  जवाब  तो  वक़्त  खुद  ही  दे  देगा,  लेकिन  कुछ  सवाल  हमेसा  के  लिए  सवाल  ही  बनकर  हमारे  जहन  में  रह  जाएंगे  और  यादों  को  जरिया  बनाकर  पूरी  जिंदगी  हमे  एक  दूसरे  की  याद  दिलाते  रहेंगे।  इसतरह  मेरा  नजरिया  ये  है  कि  भले  ही  जवाब  हमे  अलग  कर  दे  लेकिन  सवाल  हमेसा  साथ  रखेगा।


         उस  दिन  बातों  बातों  में  2 घण्टे  निकल  चुके  थे  उसका  ध्यान  घड़ी  पर  जाते  ही  वो  घबरा  सी  गयी  और  तुरन्त  ही  उठकर  भागने  लगी,  उसे  डर  हो  गया  कि  शायद  उसके  पापा  घर  आ  चुके  होंगे  उसने  मुझसे  कहा  तुम  अपने  रूम  पर  चले  जाना  मैं  कल  मिलती  हू  कॉलेज  में।  उसने  अपनी  स्कूटी  स्टार्ट  की  और  वहां  से  चली  गयी  पर  मैं  कुछ  और  देर  के  लिए  वहां  ठहर  गया।  और  उसके  जाने  के  बाद  मैं  बैठकर  उसके  पूछे  उन  सवालों  को  सोच  रहा  था  जिसका  जवाब  मैंने  उसे  दे  तो  दिया  था  पर  ऐसे  लग  रहा  था  जैसे  मैंने  उसे  सुलझाने  की  जगह  उसे  उलझा  दिया  है।  ऐसे  ही  कुछ  ख्यालो  से  लड़ते  हुए  मैंने  अपना  थोड़ा  वक्त  अकेले  उस  जगह  और  बिताया  जहाँ  अक्सर  हम  साथ  ही  आते  थे। इतने  में  उसका  कॉल  आया  कि  वो  घर  पहुच  गयी  है...  और  बाद  में  कॉल  करती  हूं।  


मेरे  दिमाग  मे  बस  यही  चल  रहा  था  कि  ना  जाने  कब  हमे  एकदूसरे  से  इतनी  मोहब्बक्त  हो  गयी  थी,  ना  जाने  कब  वो  मुझे  इतना  चाहने  लगी  थी,  और  इस  कब  का  जवाब  मुझे  जानना  ही  नही  था  और  मुझे  ये  भी  नही  समझना  था  कि  सच  मे  हमे  एकदूसरे  से  इतनी  मोहब्बक्त  हो  रही  थी,  क्योंकि  अगर  सच  मे  मोहब्बक्त  इतनी  गहराई  में  उतरेगी  तो  घाव  भी  ऐसा  ही  कुछ  नासूर  सा  छोड़कर  जाएगी  जो बर्दास्त  के  बाहर  होगा।  मैं  उसका  साथ  तो  चाहता  था  पर  शायद  अब मोहब्बक्त  से  डरने  भी  लगा  था।

Chapter-7
                  ख्वाहिशे


देखते  ही  देखते  मोहब्बक्त  का  वो  पड़ाव  आने  वाला  था,  जिसमे  हमे  दूरियों  का  एहसास  हो  जाता  है  और  ये  समझ  आने  लगता  है  कि, 

 दूरियों  से  एकदूसरे  की  एहमियत  तो  बढ़  जाती  है  लेकिन  मोहब्बक्त  दम  तोड़ने  लगती  है...


Comments

  1. Love philosophy is good as per your perception...but I think Distance can never destroy your love. It always heal you, it always pour that purity of love on you when you are far away from your beloved

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    1. I know that distance does not end the relationship .. but one doubt still makes a place in the mind... By the way thanks for ur comment..

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  2. Replies
    1. Thank u... It is intresting because u read😍

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  3. यह बहुत ही रोचक और मजेदार कहानी है।❤️❤️❤️

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    1. आपने मेरी कहानी पढ़ी और पसन्द की उसके लिए मैं आपका धन्यवाद करता हु... Next chapter jaldi hi aa jaayega

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