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Showing posts from July, 2021

पिता की जुबानी!

  तब सोचा था एक सुनहरा कल होगा। आज भले ही नौकर है कहि पर, पर कल अपना भी एक बड़ा घर होगा। आज लिखते हुए देखता हूं, अपने छोटे से बच्चे को तो बहुत गर्व होता है। खुद तो पढा लिखा नही हूं, पर उसका लिखा पढ़ लेता हूं। खूब मेहनत कर के उसे अच्छे स्कूल में भेजने की चाहत है। जो मैं ना पा सका वो सब उसे दिलाने की चाहत है। अब ड्यूटी डबल करने का समय आ गया है। मेरा बेटा अब स्कूल जाने के लायक हो गया है। उसकी फीस उसकी पढ़ाई में रुकावट ना बने, इसलिए थोड़ी बचत करने का समय आ गया है। मेरी बीवी की चाहते बिल्कुल खत्म सी हो गयी है। क्योंकि उसको भी बच्चे को पढाने की, फिक्र सी हो गयी है। उसे मालूम है पढ़ लिख जाएगा तो बड़ा साहब बनेगा, तब मेरी सारी इच्छाओं को वो, खुद ही पूरा करेगा। घर मे 24घण्टे रोशनी की व्यवस्था कर दी है। हम भले ही 2 रोटी कम खाये पर उसके लिए टिफ़िन की व्यवस्था कर दी है। अब तो बस फिक्र रहती है, कोई रुकावट न आये पढ़ाई में उसके। इधर उधर की आदतों को छोड़, उसके ट्यूशन की भी व्यवस्था कर दी है। छाती गर्व से फूल गयी माँ-बापू की, बेटे ने बोर्ड में टॉप किया। पर अंदर मन मे ये चिंता है, की अब बेटा स

Engineering Aur Pyaar (8) The End!

Chapter-8                  आने वाला कल( The End)      कई  बार  जब  हम  किसी  के  साथ  होते  है  या  जब  कोई  हमारा  बहुत  खास  बन  जाता  है,  तो  हमें  लगने  लगता  है  की  अब  यहां  से  हम  उसके  बिना  रह  नही  सकते  पर  जिंदगी  को  सुलझाने  में  हम  इतने  उलझ  जाते  है  कि  कुछ  तो  खुद  ही  भूल  जाते  है  हम  और  कुछ  भूल  जाने  का  नाटक  करते  है।           कॉलेज  के  फेयरवेल  के  कुछ  दिन  बाद  ही  हमारी  परीक्षाएं  शुरू  हो  गयी  थी,  क्योंकि  दोनों  की  परीक्षाएं  अलग  अलग  जगह  पर  थी  इसलिए  मुलाकात  नही  हो  पाती  थी।  सभी  को  इंतज़ार  था  कि  जैसे-तैसे  ये  सब  खत्म  हो  और  छुट्टियों  में  घर  जाया  जाए।  पर  इस  बार  मैं  नही  चाहता  था  कि  ये  परीक्षाएं  ये  दिन  खत्म  हो,  मैं  जैसे  समय  को  रोकने  की  सोच  में  था।  पर  ऐसा  मुमकिन  ना  था  और  हमारे  प्रैक्टिकल्स  वगैरह  सब  खत्म  हो  गए  और  2 महीने  की  छुट्टियां  हो  गयी  सब  अपने  अपने  घरों  को  चल  दिये  पर  मैं  बहाने  सोचने  में  था  लेकिन  उस  साल  हमारी  ट्रेनिंग  होनी  थी  तो  मुझे  मजबूरी  में  जाना  ही