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Engineering Aur Pyaar (8) The End!

Chapter-8                  आने वाला कल( The End)      कई  बार  जब  हम  किसी  के  साथ  होते  है  या  जब  कोई  हमारा  बहुत  खास  बन  जाता  है,  तो  हमें  लगने  लगता  है  की  अब  यहां  से  हम  उसके  बिना  रह  नही  सकते  पर  जिंदगी  को  सुलझाने  में  हम  इतने  उलझ  जाते  है  कि  कुछ  तो  खुद  ही  भूल  जाते  है  हम  और  कुछ  भूल  जाने  का  नाटक  करते  है।           कॉलेज  के  फेयरवेल  के  कुछ  दिन  बाद  ही  हमारी  परीक्षाएं  शुरू  हो  गयी  थी,  क्योंकि  दोनों  की  परीक्षाएं  अलग  अलग  जगह  पर  थी  इसलिए  मुलाकात  नही  हो  पाती  थी।  सभी  को  इंतज़ार  था  कि  जैसे-तैसे  ये  सब  खत्म  हो  और  छुट्टियों  में  घर  जाया  जाए।  पर  इस  बार  मैं  नही  चाहता  था  कि  ये  परीक्षाएं  ये  दिन  खत्म  हो,  मैं  जैसे  समय  को  रोकने  की  सोच  में  था।  पर  ऐसा  मुमकिन  ना  था  और  हमारे  प्रैक्टिकल्स  वगैरह  सब  खत्म  हो  गए  और  2 महीने  की  छुट्टियां  हो  गयी  सब  अपने  अपने  घरों  को  चल  दिये  पर  मैं  बहाने  सोचने  में  था  लेकिन  उस  साल  हमारी  ट्रेनिंग  होनी  थी  तो  मुझे  मजबूरी  में  जाना  ही
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Engineering Aur Pyaar (7)

  Chapter-7                   ख्वाहिशे                  कोशिशें  कितनी  भी  कर  ले  पर  ख्वाहिशें  अक्सर  अधूरी  रह  ही  जाती  है  क्योंकि  ख्वाहिशो  का  काम  है  वक़्त  के  साथ   बदलते  रहना  और  वक़्त  पर  गर  कोई  ख्वाहिश  पूरी  हो  जाये  तो  तुरंत  ही  हम  उसके  आगे  की  किसी  ख्वाहिश  को  साथ  जोड़  लेते  है।  ख्वाहिश  और  जिंदगी  का  एक  अनदेखा  सा  रिश्ता  है  जो  वक़्त  के  साथ  जिंदगी  जीने  का  जरिया  भी  बन  जाता  है। देखते  ही  देखते  वो  वक़्त  एकदम  से  करीब  आकर  खड़ा  था  जिसमे  मुझे  उस  लम्हे  से  होकर  गुजरना  था  जिसकी  चाहत  जिसकी  उम्मीद  तक  मैंने  नही  की  थी,  जब  ये  शुरू  हुआ  तब  सिर्फ  कुछ  ख्वाइशें  ही  थी  जो  इस  रिश्ते  से  जुड़ी  थी  पर  ये  लम्हा  जिसका अभी  से  पहले  कभी  ख्याल  तक  नही  आया  था  ये  शुरुवात  से  साथ  ही  था।  बस  दिल  मे  भरी  मोहब्बक्त  कहो  या  समझ  का  हेर-फेर  इस  लम्हे  को  अभी  से  पहले  ना  मैं  सोच  पाया  था  और  नाही  इसके  लिए  मैं  तैयार  था।  वैसे  तो  उसके  जाने  में  अभी  4...  6  महीने  का  वक़्त  था  पर  ऐसा  महसूस  होने 

Engineering aur pyaar (6)

  Chapter-6                          हसीन मोड़            जीवन  मे  कितनी  ही  बार  अच्छे  वक्त  की  पहचान  उस  वक़्त  के  बीत  जाने  के  बाद  होती  है  लेकिन  बुरा  वक्त  शुरुवात  से  ही  अपने  होने  की  दस्तक  हमारे  कानो  तक  पहुचा  देता  है।  शायद  इसलिए  हम  अच्छे  और  बुरे  वक्त  को  उसकी  पहचान  के  हिसाब  से  जीते  है  और  हर  बार  अच्छे  वक़्त  की  उम्र  छोटी  होती  है  हमारे  लिए  क्योंकि  उसको  पहचानने  में  ही  हम  आधे  से  ज्यादा  वक़्त  को  गवा  चुके  होते  है।  शायद  इसलिए  ही  हर  बार  हमें  अपने  दुखों  का  पड़ला  भारी  लगता  है  सुख  के  तराजू  से।।      कॉलेज  में  मेरे  दो  साल  खत्म  हो  चुके  थे  और  कॉलेज  के  पहले  दिन  से  लेकर  आजतक  में  काफी  कुछ  बदल  चुका  था।  वो  लड़का  जो  अपनी  बातों  को  किसी  से  बताने  की  जगह  अपनी  डायरी  के  पन्नो  को  भरता  था  वो  अब  उन्ही  बातों  को  किस्सों  कहानियों  में  पिरोकर  सभी  को  बेहिचक  सुनाता  है,  वो  लड़का  जो  लड़कियों  से  बात  करने  में  हिचकिचाता  था  अब  वो  एक  लड़की  को  अपने  दिल  का  हाल  सुनाने  लगा  है।..

पतन त्योहारों का!!

  मैंने  पढा  था  कही  की  त्योहार  खुशिया  मनाने  और  गमो  को  भूल  जाने  के  लिए  मनाए  जाते  है,  और  हमारे  यहां  तो  हर  त्योहार  की  अपनी  एक  कहानी  है।  कोई  त्योहार  हमे  सिखाता  है,  बुराई  पर  सदैव  अच्छाई  की  ही  जीत  होती  है  तो  कोई  बताता  है  कि  अधर्म  पर  धर्म  की  विजय  तय  है... ये  सब  पढ़ने  और  समझने  के  बाद  ये  समझ  आता  है  कि  त्योहार  सिर्फ  खुशिया  बाटने  और  हर्षोउल्लास  से  नही  जुड़ा  बल्कि,  ये  हमारे  धर्म  और  संस्कार की  पहचान  कराता  है।  त्योहारों  का  होना  यानी  धर्म  और  संस्कार  का  होना।।  आज  हम  आधुनिकता  के  उस  दौर  से  गुजर  रहे  है,  जहाँ  हम  अपनी  सुख  सुविधाओं  में  अपने  त्योहारों  के  असली   मायने  तक  भूल  गए  है।  मुझे  पता  है  हम  में  से  कितने  है,  जिन्हें  कोई  फर्क  नही  पड़ता  क्योंकि  हम  हर  त्योहार  सोशल  मीडिया  और  व्हाट्सएप्प  पर  स्टेटस  लगाकर  मना  रहे  है,  लेकिन  सोचना  ये  है  कि  कही  ऐसे  ही  हमारी  पहचान  हमारी  संस्कृति  इसी  फोन  में  सिमट  के  ना  रह  जाये।।। बीते  कुछ  दिन  पहले  हमारे  यहां  एक  त्योह

Engineering aur pyaar (5)

  Chapter -5                       तकरार !... अक्सर  ऐसा  होता  है  की  प्यार  एक  नजर  का  मोहताज  होता  है  पर  कई  बार  इसके  मायने  अलग  भी  होते  है... पहली  नज़र  के  प्यार  को  हम  किसी  की  ओर  आकर्षित  होना  कह  सकते  है  पर  जिस  प्यार  की  परिभाषा  पहली  नज़र  से  अलग  होती  है  शायद  वो  आकर्षण  से  कोसो  दूर  होती  है... बस  ये  कहना  है  कि  प्यार  को  प्यार  बनने  का  समय  देना  जरूरी  है  फिर  चाहे  वो  पहली  नज़र  में  हुआ  हो  या  वक़्त  लेकर।। ~~~ उस  मुलाकात  ने  मुझे  सोचने  पर  मजबूर  कर  दिया  था,  साथ  ही  हालात  कुछ  ऐसे  बन  गए  थे  कि  शायद  वो  अब  मेरी  तरफ  देखेगी  भी  नही।  उसकी  नाराज़गी  को  2  ही  दिन  हुए  थे  कि  कॉलेज  के  सीनियर्स  को  ये  पता  लग  गया  था  कि,  मैं  उनके  बैच  की  एक  लड़की  को  परेशान  कर  रहा  हू ।  जिसके  लिए  उन्होंने  मुझे  कॉलेज  की  कैंटीन  में  घेर  लिया  पर  पता  नही  क्यों  बिना  कुछ  बोले  घूरते  हुए  वहां  से  चले  गए।  उस  दिन  छुट्टी  से  कुछ  मिनटो  पहले  ही  मैं  अपने  2  दोस्तो  के  साथ  गेट  से  बाहर  निकला  और 

महिला दिवस ??

                           कभी  कभी  हमारे  कैलेंडर  में  कुछ  ऐसी  तारीख  आती  है  या  कोई  ऐसा  दिन  आता  है  जिससे  हम  पूरी  तरह  सहमति  नही  रखते  है  हमे  लगता  है  कि  नही  ये  एक  दिन  में  सिमट  जाए  ऐसा  सम्मान  नही  है  या  ये  सिर्फ  एक  दिन  नही  पूरे  साल,  साल  के  हर  दिन  होना  चाहिए।  एक  ऐसी  ही  तारीख  है  आज  08मार्च एक  ऐसा  ही  दिन  है  आज Womens's day(महिला दिवस) क्या  ये  दिन  काफी  है  उन  महिलाओं  के  सम्मान  में  जो  इस  पूरे  समाज  की  रूप-रेखा  तय  करती  है,  जिन्हें  इस  धरती  की  सबसे  ताकतवर  प्राणी  होने  के  बाद  भी  सबसे  कमजोर  बताया  जाता  है,  क्या  सच  मे  काफी  है  ये  एक  दिन   उन  महिलाओं  के  लिए  जिन्हें  समाज  और  रीति-रिवाज  के  नाम  की  बेड़ियों  में  बांधकर  रखा  जाता  है  या  उन  महिलाओं  के  लिए  जो  अपना  जिस्म  बेचकर  अपनी  जैसी  ना  जाने  कितनी  महिलाओं  को  हवस  के  शिकारी  कुत्तो  से  बचाती  है।  क्या  सच  मे  इस  एक  दिन  से  उन  सारी  महिलाओं  का  सम्मान  होता  है,  जो  किसी  और  कि  ज़िद  और  गुस्से  का  शिकार  (एसिड अटैक