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Delhi jal rhi hai_Desh jal rha hai


Ye  koun  sa  panchi  hai  jo  udta  hi  jaa  rha  hai
Hwa  me  zahar  aur  tirange  me  daag  lgata  jaa  rha  hai
Mudde  to  kai  hai  apne  desh  me  uthane  ko  janaab
Ye  kaisa  mudda  hai  jisme  pura  desh  jla  jaa  rha  hai

Hum  mante  hai  ki  sbhi  ka  khoon  saamil  hai  tirnge  ki  shaan  me
Fir  ye  koun  hai  jo  hmaare  tirnge  ko  fir  khoon  me  dubota  jaa  rha  hai
Ye  koun  sa  panchi  hai  jo  udta  hi  jaa  rha  hai
Logo  ki  jindgi  ar  ghar  sbko  jlata  hi  jaa  rha  hai

Desh  ko  hmare  hmne  hi  aage bdhne  na  diya
Do  char  logo  k  bhkane  se  hmne  apno  ko  hi  kuchal  diya
Sb  baat  krte  hai  sirf  dharm  ki  jaat  ki
Hmne  apne  hindustan  ko  hindustan  bnne  na  diya

Berojgaari  ar  baltkar  sb  kitna bdhta  jaa  rha  hai
In  muddo  ko  chod  ye  desh  naa  jaane  kha  bhtka  jaa  rha  hai 
Ye  koun  sa  panchi  hai  jo  udta  hi  jaa  rha  hai
Aaps  me  hi  ladkr  mrna  sikha  rha  hai
Ye  koun  sa  panchi  hai  jo  udta  hi jaa  rha  hai

Rajneeti  ki  baat  kya  kre  janaab  ab  to  sbkuch  free  hota  jaa  rha  hai 
Koi  dharm  to  koi  jaati  pr  hmko batata  hi  jaa  rha  hai
Muddo  me  koi  smshyao  pr  baat hi  nii  krta  hai  ab 
Desh  ki  smshyao  ko  kaise  bdhaya jaaye  bss  iske  liye  campaign chlaya  jaa  rha  hai 

Tawa  garam  kr  rotiya  seke  jaa rhe  hai
Ye  mutthi  bhar  neta  hmara  chain aur  sukoon  lete  jaa  rhe  hai 
Ye  koun  sa  panchi  hai  jo  udta  hi ja  rha  hai 
Apno  ke  hi  haatho  apno  pr  patthr  chlwata  jaa  rha  hai 

Desh  me  fail  rhi  gandgi  ko  ab hme  hi  saaf  krna  hai 
Ye  desh  ke  khilaf  kaam  kr  rhe hai  ab  hme  inke  khilaf  hona  hai 
Mai  ye  nii  khta  ki  apni  baate khne  ko  koi  aazad  nii  hai 
Lekin  apne  muddo  k  liye  logo  ko maaroge  to  ye  brdaast  nii  hai 

Naa  jaane  koun  si  aazadi  k  liye desh  ko  daav  pr  lgaaya  jaa  rha hai 
Jal  to  rhi  hai  bss  dilli  hi  pr  aise hi  pure  desh  ko  jlaaya  jaa  rha hai 
Ye  koun  sa  panchi  hai  jo  udta  hi jaa  rha  hai 

Ab  to  rok  lo  ye  aatank  ki  isme pura  desh  dubta  jaa  rha  hai 
Birodh  krne  ke  chkkr  me  apno  ko  maara  jaa  rha  hai
Ye  jo  bi  panchi  hai  galat  disha me  udta  jaa  rha  hai 
Dharam  ar  jaati  k  naam  pr  desh ke  tukde  hi  krta  jaa  rha  hai 
Ye  jo  bhi  pnchi  hai  galat  disha me  udta  jaa  rha  hai 

Is  panchi  ko  shi  disha  dikhana  hai 
Ab  apne  desh  ko  hme  milkr  in andhkaaro  se  nikalna  hai...

#Delhiriots 




Comments

  1. Since earlier as I know you have been writing so impressive and effective lines either it is on feelings or it is on any current topics. Your creations have been so deep as they leave an impression on ones mind.... Excellent....great job...

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