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Lockdown (jaan hai to jahan hai)


कृपया  अपनी  मदद  करे  देश  की  मदद  करे ।
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गाड़ियों  का  शोर  और  सड़कों  की  धूल  सब  थम  सी  गयी  है ।
लोगो  की  भीड़  और  वो  भीड़  से  आगे  निकलने  की  होड़  अब  रुक  सी  गयी  है।
मिलते  नही  थे  जो  सुकून  से  दो  पल  भी  जीने  को ,
आज  लॉकडाउन  की  वजह  से  वो  जिंदगी  भी  मिल  गयी  है ।

इस  अनजान  सी  लड़ाई  से  हम  सबको  मिलकर  लड़ना  है ।
बेशक  आज  खो  दिया  है  सबकुछ,  पर  जीत  कर  इस  लड़ाई  को  फिर  सब  हासिल  करना  है ।
इस  हौसले  को  साथ  रख  कर  ही  अब  आगे  बढ़ना  है ।
लॉकडाउन  में  रह  कर  इस  कोरोना  की  कमर  को  तोड़ना  है ।

कितनो  के  घर  उजड़  गए  कितने  बेचारे  खाने  को  तरस  गए ।
कुछ  तो  पैदल  ही  नामुमकिन  सी  दूरी  तय  करने  निकल  गए ।
एक  तरफ  पेट  की  आवाज़  है,  तो  दूसरी  तरफ  कोरोना  का  डर !
क्या  करे  बेचारे  गरीब  अपने  परिवार  की  सुरक्षा  को  लेकर  डर  गए ।

देश  का  हर  बड़ा  छोटा  साथ  खड़ा  है ।
बस  डर  कुछ  जाहिल  गवारो  का  हुआ  है ।
ना  जाने  क्या  समझते  है  ये  मुट्ठी  भर  लोग  खुद  को ,
यहां  सवाल  बस  हमारे  संस्कारो  का  है।

हमारे  संस्कार  हमारे  धर्म  ने  कभी  बिरोध  सिखाया  नही  है ।
पर  अब  शांत  रह  सके  हम  ऐसा  इनका  इरादा  नही  है ।
ये  चाहते  है  अब  खुद  से  खुद  की  आज़ादी ,
अब  इन्हें  आज़ाद  करने  के  अलावा  हमारे  पास  और  कोई  राह  नही  है ।

डॉक्टर  भगवान  हो  गए  पुलिस  वाले  ड्यूटी  में  ईमानदार  हो  गए ।
कितनो  ने  बेवकूफी  में  लाठिया  है  खाई ,
इस  लॉकडाउन  में  ना  जाने  कितने  पुलिस  के  हाथों  समझदार  हो  गए ।

घर  पर  रहकर  हम  सब  फिर  माँ-पापा  के  कितने  करीब  आ  गए ।
वो  बचपन  की  कहानियां  और  वो  शरारती  खेल  सब  याद  आ  गए ।
मैं  मानता  हूं  कि  कोरोना  ने  कितनी  जिंदगियां  बर्बाद  कर  दी ,
पर  इस  लॉकडाउन  ने  घर  में  बंद  कर  करोड़ो  की  जिंदगी  आबाद  कर  दी ।

यकीन  है  अपनी  एकजुटता  पर  एक  रोज़  तो  कोरोना  हारेगा ।
मिलकर  मात  देंगे  इस  महामारी  को  अपने  देश  से  ये  जल्दी  ही  भागेगा ।
हम  अपने  घरों  में  रहकर  भी  करेंगे  अपने  देश  की  रक्षा ,
जब  हमसब  खुद  की  बचाएंगे  जान  तभी  तो  हिंदुस्तान  जीतेगा ।

हमसब  साथ  है  बस  कुछ  ही  जाहिल  गवार  है ।
कोरोना  को  हरा  हम  इसके  बाद  उठ  खड़े  होने  को  तैयार  है ।
जवाब  मिलेगा  सबको  जिनका  इस  बीमारी  को  बढ़ाने  में  योगदान  है ।
क्योंकि,  'जैसी  करनी  वैसी  भरनी'  की  कहावत  से  जुड़ा  हमारा  हिंदुस्तान  है ।




कृपया  घर  पर  रहे  सुरक्षित  रहे  क्योंकि  आप  समझदार  और  किसी  के  जीने  की  वजह  है ।
बाकी  मरने  मारने  को  तो  कई  जाहिल तैयार  है ।

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