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आज़ादी...




आज  हमारे  74वें  स्वतन्त्रता  दिवस  की  आप  सभी  को  मेरे  और  मेरे  परिवार  की  तरफ  से  हार्दिक  बधाईया!    भगवान  करे  कि  अपने  देश  की  अखंडता  और  आज़ादी  को  हमसब  साथ  मिलकर  आगे  ले  जाये
वैसे  तो  आज  आज़ादी  का  जश्न  मनाने  का  दिन  है,  पर  साथ  ही  साथ  कुछ  सोचने  का  दिन  भी  है,  की  हमसे  चूक  कहा  हुई  है...

मेरा  नमन  है  उन  वीर  जवानों  को जिन्होंने  आज़ादी  के  लिए  अपने  प्राण  त्याग  दिए  और  उनको  जो  इस  तिरंगे  की  शान  को  हमेसा  ऊपर  उठाएं  रखने  के  लिए   आज  भी  इसकी सुरक्षा  में  खड़े  है...  आज  भी  भारत  देश  को  आज़ाद  रखने  के  लिए  अपने  प्राणों  की  आहुति  देने  से  पीछे  नही  हटते।                      ये  हमारे  देश  की  बिडम्बना  ही  है  कि  हम  जिस  आज़ादी  की  लड़ाई   74साल  पहले  जीते  थे  उस  जीत  के  सिर्फ  2,   4  नामो  के  अलावा  किसी  को  नही  जानते  है  या  कहू  की  हमे  पूरा  सच  बताया  ही  नही  गया  की  हमे  किसका  किसका  सम्मान  करना  है।  मैं  भी  इस  टॉपिक  को  छेड़ना  चाहता  हु  क्योंकि  मुझे  पता  है  कि  किसी  को  नही  पड़ी  है  इन  बातों  की  और  जिन्हें  पड़ी  है  उन्हें  बताना  नही  पड़ता।...
खैर  मुझे  चिंता  है  मेरे  आज  के  भारत  की...     

ये  कौन  है  जो  मेरे  इस  देश  को  दंगो  की  आड़  में  जलाए  जा  रहे  है।
ये  कौन  है  जो  मेरे  देश  के  अखंडता  की  लव  बुझाये  जा  रहे  है।
मुझे  पूछना  है  सवाल  खुद  से  और  आप  सब  से,
ये  कौन  है  जो  मेरे  देश  की  आज़ादी  को  मिटाये  जा  रहे  है।

आज  हमारे  देश  मे  एक  कॉलेज  में  पढ़ने  वाले  विद्यार्थी  आज़ादी  के  नारे  लगाते  है।
आज  हमारे  देश  मे  सेक्युलर  के  नारों  के  बीच  दंगे  कराए  जाते  है।
आज  भी  हमारे  देश  मे  बेटियों  की  सुरक्षा  के  नाम  पर  हम  बस  मोमबत्तिया  जलाए  जाते  है।
आज  भी  हम  कुछ  चंद  लोगो  की  मुट्ठियों  में  कैद  रहकर  इंसानियत  भुलाये  जाते  है।

हम  कैद  है  कुछ  ऐसी  विचारधाराओ  में,  जो  हमे  साथ  रहने  से  ज्यादा  अलग  रहना  सिखाती  है। ...   
                   हम  कैद  है  ऐसी  बेड़ियों  में,  जिनकी  चाभियां  हमने  खुद  ही  कुछ  चंद  लोगो  की  मुट्ठियों  में  रख  दी  है,  जो  हमारा  इस्तेमाल  अपने  फायदे  के  लिए  करते  है।...    
             हम  कैद  है  कुछ  ऐसी  नीतियों  में,  जिनमे  हमे  कुछ  भी  बोलने  की  आज़ादी  तो  मिली  पर  हम  इस  हक़  का  इस्तेमाल  सिर्फ  भीड़  को  बहकाने  और  देश  की  छवि  को  खराब  करने  में  करते  है।
               हम  कैद  है  कुछ  ऐसी  मानसिकता  वाले  लोगो  के  चुंगल  में,  जो  आज  भी  महिलाओं  को  उनका  सम्मान  देने  पर  चिढ़  से  जाते  है।...      जो  आज  भी  महिलाओं  को  चारदीवारी  में  बंद  रखना  अपना  स्वाभिमान  समझते  है।

                     ये  वही  आज़ाद  देश  है  जिसमे  एक  बेटी  एक  महिला  को  रेप  कर  के  मार  दिया। जाता  है  तो  लोग  सिर्फ  मोमबत्तिया  लेकर  सड़को  पर  निकल  आते  है...
और  वही  दूसरी  तरफ  कुछ  ऐसे  भी  है  जो  सिर्फ  छोटी  छोटी  बातों  पर  हाथो  में  पत्थर  लिए  सड़कों  पर  निकल  आते  है।

ये  वही  आज़ाद  देश  है  जहाँ  बेरोजगारी  और  गरीबी  सिर्फ  एक  मुद्दा  है  बहस  का...
और  वही  दूसरी  तरफ  एक  जाति  एक  धर्म  के  नाम  पर  पूरे  देश  को  जलाने  का।

                       ये  वही  आज़ाद  देश  है  जहाँ  एक  तरफ  तो  ना  जाने  कितने  तिरंगे  के  लिए  जान  दे  रहे  है,  कितने  तिरंगे  की  शान  में  अपने  प्राण  दे  रहे  है...
और  वही  दूसरी  तरफ  कुछ  ऐसे  भी  है  जिनको  हमारे  तिरंगे  के  सम्मान  में  एक  मिनट  खड़ा  होना  भी  बुरा  लगता  है।

                  ये  वही  आज़ाद  देश  है  जिसने,  अपने  लोगो  की  इतनी  आज़ादी  दी  है  कि,  वो  अपने  देश  को  गाली  दे  सकते  है,  अपने  तिरंगे  का  अपमान  कर  सकते  है...         हम  अपने  देश  के  सर्वोच्च  पद  पर  बैठे  इंसान  को  भी  उतना  सम्मान  नही  दे  पाते  है  जितनी  उसे  देनी  चाहिए।  यहां  हर  बार  इस  बोलने  की  आज़ादी  का  फायदा  देश  की  इज़्ज़त  को  धूमिल  करने  के  लिए  किया  जाता  है।

                   हम  उस  आज़ाद  देश  मे  रहते  है  जहाँ  हम  बेरोजगारी,  रेप,  गरीबी  और  ना  जाने  कितने  ही  मुद्दों  से  घिरे  होने  पर  भी  सिर्फ  उसके  लिए  बाते  करते  है  लेकिन  कुछ  अवसाद  जो  धर्म  के  नाम  पर  हमारे  बीच  घोला  जाता  है  उसके  लिए  हम  अपने  देश  जिसे  सारे  जहां  से  अच्छा  कहते  है  उसे  आग  के  हवाले  करने  में  देरी  नही  करते।

          मैं  कहता  हूं  कि  मुझे  नही  चाहिए  ऐसी  आज़ादी  जिसमे  आज़ाद  होने  का  मतलब  अपने  ही  देश  के  खिलाफ  नारे  लगाना  है।
        नही  चाहिए  ऐसी  आज़ादी  जो  हमे  आपस  मे  सिर्फ  इसलिए  लड़ाते  है  कि  अपनी  सर्वोच्चता  साबित  कर  सके।
            नही  चाहिए  ऐसी  आज़ादी  जिसमे  महिलाओ  के  रेप  पर  सिर्फ  घड़ियाली  आंसू  और  मोमबत्ती  जलती  है  और  धर्म  के  नाम  पर  पूरे  देश  को  फूक  दिया  जाता  है।
       नही  चाहिए  ऐसी  आज़ादी  जो  रोजगार  और  बेकारी  के  लिए  लड़ने  के  बजाय  उनके  लिए  लड़ते  है  जो  देश  मे  आतंक  फैलाते  है।

हम  ऐसे  देश  मे  रहते  है,  जहाँ  शहीद  हुए  सैनिक  को  कोई  तबतक  नही  जानता  जबतक  उसपर  मूवी  नही  बन  जाती।
हम  उन  सैनिको  उतना  भी  सम्मान  नही  दे  पाते  जिसके  वो  हक़दार  होते  है...  वही  उनपर  मूवी  बनाने  वाले  हीरोज  को  हम  सरआंखो  पर  बैठाते  है।
                  हमे  अपने  देश  से  प्यार  तो  है पर  इस  प्यार  को  निभाने  की  जो  जिम्मेदारी  है,  वो  हम  नही  लेना  चाहते।  हमे  लगता  है  की  इस  देश  को  संभालने  और  आज़ाद  रखने  का  ठीकरा  सिर्फ  सैनिको  और  कुछ  नेताओं  का  है...  लेकिन  ऐसा  नही  है,          जबतक  हम  खुद  में  कोई  बदलाव  नही  लाएंगे,  जब  तक  हम  समझदार  नही  बनेंगे,  तब  तक  ये  देश  इन्ही  बेड़ियों  में  कैद  रहेगा।       
             हमे  आवाज़  उठानी  है  पर  अपने  हक़  के  लिए  हमे  अपनी  एकता  दिखानी  है  पर  देश  के  भले  के  लिए।       हमे  लड़ना है  लेकिन  अपनी  सोच  अपने  काम  से,  पत्थर  और  हथियार  से  नही।           हमे  बताना  है  कि  ये  देश  आज  भी   "अहिंसा  परमो  धर्मां!"  के  सिद्धांत  पर  कायम  है...   हमे  बताना  है  कि  ये  देश  आज  भी  उन  वीरो  का  देश  है  जिन्होंने  इस  देश  की  अखंडता,  स्वाभिमान  और  सभ्यता  बनाये  रखने  के  लिए  अपना  बलिदान  दिया  था।  इस  रूढ़िवादी  सेकलुरिजम  और  कुछ  वो  लोग  जो  एक  तरफ  तो  इस्लाम  को  शान्ति  का  दूत  कहते  है  और  दूसरी  तरफ  उसके  नाम  पर  दंगे  कराते  है  उनसे  भी  बचना  है  और  उन्हें  जवाब  देना  है,  और  अपने  इस  देश  को  खूबसूरत  और  सबसे  प्यारा  बनाना  है।  यही  एक  प्रण  हम  सभी  देशवासियों  को  लेना  होगा,  तभी  हम  असल  रूप  में  आज़ाद  कहलायेंगे।

जय  हिंद!  जय  भारत!


Comments

  1. Nice article bro, writing skill is improving...making the reader to be with the words....and feelings of the lines.

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    1. Thnak you brother... But that's the fact of our society jiski wjh se is desh ki chavi bigad di h logo ne...

      Delete
  2. Awesome bhai...
    Congrats and keep it up.
    Our blessings and good wishes are always with you.
    JAI HIND JAI BHARAT💐

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