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Showing posts from March, 2021

Engineering aur pyaar (5)

  Chapter -5                       तकरार !... अक्सर  ऐसा  होता  है  की  प्यार  एक  नजर  का  मोहताज  होता  है  पर  कई  बार  इसके  मायने  अलग  भी  होते  है... पहली  नज़र  के  प्यार  को  हम  किसी  की  ओर  आकर्षित  होना  कह  सकते  है  पर  जिस  प्यार  की  परिभाषा  पहली  नज़र  से  अलग  होती  है  शायद  वो  आकर्षण  से  कोसो  दूर  होती  है... बस  ये  कहना  है  कि  प्यार  को  प्यार  बनने  का  समय  देना  जरूरी  है  फिर  चाहे  वो  पहली  नज़र  में  हुआ  हो  या  वक़्त  लेकर।। ~~~ उस  मुलाकात  ने  मुझे  सोचने  पर  मजबूर  कर  दिया  था,  साथ  ही  हालात  कुछ  ऐसे  बन  गए  थे  कि  शायद  वो  अब  मेरी  तरफ  देखेगी  भी  नही।  उसकी  नाराज़गी  को  2  ही  दिन  हुए  थे  कि  कॉलेज  के  सीनियर्स  को  ये  पता  लग  गया  था  कि,  मैं  उनके  बैच  की  एक  लड़की  को  परेशान  कर  रहा  हू ।  जिसके  लिए  उन्होंने  मुझे  कॉलेज  की  कैंटीन  में  घेर  लिया  पर  पता  नही  क्यों  बिना  कुछ  बोले  घूरते  हुए  वहां  से  चले  गए।  उस  दिन  छुट्टी  से  कुछ  मिनटो  पहले  ही  मैं  अपने  2  दोस्तो  के  साथ  गेट  से  बाहर  निकला  और 

महिला दिवस ??

                           कभी  कभी  हमारे  कैलेंडर  में  कुछ  ऐसी  तारीख  आती  है  या  कोई  ऐसा  दिन  आता  है  जिससे  हम  पूरी  तरह  सहमति  नही  रखते  है  हमे  लगता  है  कि  नही  ये  एक  दिन  में  सिमट  जाए  ऐसा  सम्मान  नही  है  या  ये  सिर्फ  एक  दिन  नही  पूरे  साल,  साल  के  हर  दिन  होना  चाहिए।  एक  ऐसी  ही  तारीख  है  आज  08मार्च एक  ऐसा  ही  दिन  है  आज Womens's day(महिला दिवस) क्या  ये  दिन  काफी  है  उन  महिलाओं  के  सम्मान  में  जो  इस  पूरे  समाज  की  रूप-रेखा  तय  करती  है,  जिन्हें  इस  धरती  की  सबसे  ताकतवर  प्राणी  होने  के  बाद  भी  सबसे  कमजोर  बताया  जाता  है,  क्या  सच  मे  काफी  है  ये  एक  दिन   उन  महिलाओं  के  लिए  जिन्हें  समाज  और  रीति-रिवाज  के  नाम  की  बेड़ियों  में  बांधकर  रखा  जाता  है  या  उन  महिलाओं  के  लिए  जो  अपना  जिस्म  बेचकर  अपनी  जैसी  ना  जाने  कितनी  महिलाओं  को  हवस  के  शिकारी  कुत्तो  से  बचाती  है।  क्या  सच  मे  इस  एक  दिन  से  उन  सारी  महिलाओं  का  सम्मान  होता  है,  जो  किसी  और  कि  ज़िद  और  गुस्से  का  शिकार  (एसिड अटैक

Jindgi Aur Sapne (part-3)

# मंज़िल ~~~ कई  बार  हमें  अपनी  मंज़िल  पता  नही  होती  है,  पर  फिर  भी  हम  चलते  रहते  है  लेकिन  कहि  न  कही  रास्ते  के  किसी  मोड़  पर  जब  हम  कुछ  पल  के  लिए  रुकते  है,  तब  ख्याल  आता  है  कि  लोगो  को  देखकर  ये  जो  रास्ता  चुना  है  मैंने  क्या  इन  रास्तों  पर  चलते  हुए  कोई  मुझे  मुझ  जैसे  मिलेगा  या  फिर  शायद  एक  रोज़  इन  बेमन  के  रास्तों  पर  चलते-चलते  मैं  खुद  का  वजूद  कहि  खो  दूंगा  और  एक  दिन  शायद  किसी  मंज़िल  तक  मैं  पहुच  भी  जाऊं  लेकिन  अगले  ही  पल  मुझे  खुद  को  ढूंढना  होगा। मंज़िल  से  भटके  हुए  इंसान  पर  आधारित  एक  कविता  कृपया  इसे  पूरा  अवश्य  पढ़ें! धन्यवाद🙏 ~~~ मैं  तलाश  में  हू   खुद  के  ढूंढता  हू दर-ब-दर  अपने  ही  निशान! कभी  ख्यालो  के  पीछे  ढूंढता  हू   खुद  को, कभी  दरवाज़े  के  पीछे  तलाशता  हू ! किसी  आवाज़  का  पीछा  कर  लेता  हूं  यूही  कभी, कभी  लाख  चिल्लाने  पर  भी  सन्नाटा  पसरा  रहता  है! ना  जाने  कहा  खो  दिया  मैंने  खुद  को! कभी  परछाइयों  के  पीछे  भागता  हू , कभी  आईने  में  तलाशता  हू   खुद  को! कभी