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महिला दिवस ??

 


                         कभी  कभी  हमारे  कैलेंडर  में  कुछ  ऐसी  तारीख  आती  है  या  कोई  ऐसा  दिन  आता  है  जिससे  हम  पूरी  तरह  सहमति  नही  रखते  है  हमे  लगता  है  कि  नही  ये  एक  दिन  में  सिमट  जाए  ऐसा  सम्मान  नही  है  या  ये  सिर्फ  एक  दिन  नही  पूरे  साल,  साल  के  हर  दिन  होना  चाहिए।  एक  ऐसी  ही  तारीख  है  आज  08मार्च
एक  ऐसा  ही  दिन  है  आज
Womens's day(महिला दिवस)

क्या  ये  दिन  काफी  है  उन  महिलाओं  के  सम्मान  में  जो  इस  पूरे  समाज  की  रूप-रेखा  तय  करती  है,  जिन्हें  इस  धरती  की  सबसे  ताकतवर  प्राणी  होने  के  बाद  भी  सबसे  कमजोर  बताया  जाता  है,  क्या  सच  मे  काफी  है  ये  एक  दिन  उन  महिलाओं  के  लिए  जिन्हें  समाज  और  रीति-रिवाज  के  नाम  की  बेड़ियों  में  बांधकर  रखा  जाता  है  या  उन  महिलाओं  के  लिए  जो  अपना  जिस्म  बेचकर  अपनी  जैसी  ना  जाने  कितनी  महिलाओं  को  हवस  के  शिकारी  कुत्तो  से  बचाती  है।  क्या  सच  मे  इस  एक  दिन  से  उन  सारी  महिलाओं  का  सम्मान  होता  है,  जो  किसी  और  कि  ज़िद  और  गुस्से  का  शिकार  (एसिड अटैक)  होकर  अपना  चेहरा  अपनी  खूबसूरती  गवा  देती  है  और  शायद  अपना  वजूद  भी।

आज  के  वक़्त  में  हर  खास  दिन  हर  खुशी  हर  त्योहार  हमारे  सोशल  मीडिया  के  स्टेटस  तक  सीमित  हो  गया  है।  हर  कोई  एक  हैप्पी ____ डे  लिखकर  उस  पूरे  दिन  को  उन  तीन  अक्षरों  में  खत्म  कर  देता  है,  लेकिन  क्या  सच  मे  हम  कोई  खास  दिन  किसी  के  लिए  खास  बना  पाते  है।...  जैसे  हम  आज  का  दिन  ले  तो  क्या  जो  सम्मान  हमने  अपने  स्टेटस  पर  लिखा  है,  वो  सम्मान  इस  एक  दिन  भी  हम  किसी  महिला  को  दे  पाते  है।  क्या  ये  एक  दिन  हम  ऐसे  होते  है  जो  अपनी  बहन,  अपनी  पत्नी,  अपनी  गर्लफ्रैंड,  अपने  से  जुड़ी  महिलाओं  को  उनकी  पसंद  उनके  तरीके  से  उन्हें  रहने  देते  हो।  और  सिर्फ  अपने  ही  क्यों,  रास्ते  पर  चलती  कोई  भी  महिला  कोई  भी  लड़की  क्या  इस  एक  दिन  भी  उन  नज़रो  से  बचती  है  जिनसे  वो  हर  पल  हर  जगह  बचती  फिरती  है,  क्या  इस  एक  दिन  भी  वो  बाजार  सुनसान  होता  है,  जहाँ  लडकिया  महिलाएं  अपने  जिस्म  को  बेचने  के  लिए  मजबूर  होती  है?  क्या  इस  एक  दिन  कोई  भी  लड़की  कहि  किसी  के  द्वारा  परेशान  नही  की  जाती  क्या  इस  एक  दिन  कोई  भी  किसी  औरत  पर  अपना  हक  अपना  गुस्सा  जताने  के  लिए  उसपर  हाथ  नही  उठाता।  ये  उन  सभी  महिलाओं  के  लिए  है  जो  किसी  भी  तरह  की  मानसिक  और  शारीरिक  पीड़ा  से  गुजरती  है। 

         लेकिन  सच  क्या  है  ये  सभी  जानते  है?  क्या  ये  एक  दिन  भी  हम  उन  महिलाओं  को  दे  पाते  है  तो  शायद  उत्तर  होगा  'नही!' और  ये  मैं  सिर्फ  कुछ  चंद  लोगो  की  आंखे  खोलने  लिए  नही  लिख  रहा  हू,  इसमें  हमसब  आते  है।

तो  किस  बात  का  सम्मान  किस  काम  का  ये  दिन  और  ये  दिखावा  कबतक  उन  उम्मीदों  को  झुठलाता  रहेगा  जिसमे  महिलाओं  को  ये  लगता  है  की  ये  समाज  एक  दिन  उन्हें  उसी  तरह  स्वीकार  करेगा  जैसा  कि  हमारे  धार्मिक गर्न्थो  और  पवित्र  किताबो  में  लिखा  है।

                           जिस  एक  दिन  अखबार  से  लेकर  टी-बी  न्यूज़  तक  किसी  भी  लड़की  के  रेप  किसी  औरत  के  दहेज  उत्पीड़न  और  ऐसे  ही  किसी  भी  तरह  के  महिलाओं  पर  अत्याचार  की  खबरे  नही  होंगी  वो  एक  दिन  सच  मे  "happy women's day (महिला दिवस)"  होगा।।

एक  बार  हम  सभी  को  इसके  लिए  गम्भीरता  से  सिर्फ  सोचने  के  बजाय  इसके  लिए  कुछ  कदम  आगे  बढाना  चाहिए  और  तब  जो  परिवर्तन  होगा  वो  होगा  असली  "भारत!!"

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