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Engineering aur pyaar (5)

 


Chapter -5
                      तकरार !...


अक्सर  ऐसा  होता  है  की  प्यार  एक  नजर  का  मोहताज  होता  है  पर  कई  बार  इसके  मायने  अलग  भी  होते  है... पहली  नज़र  के  प्यार  को  हम  किसी  की  ओर  आकर्षित  होना  कह  सकते  है  पर  जिस  प्यार  की  परिभाषा  पहली  नज़र  से  अलग  होती  है  शायद  वो  आकर्षण  से  कोसो  दूर  होती  है... बस  ये  कहना  है  कि  प्यार  को  प्यार  बनने  का  समय  देना  जरूरी  है  फिर  चाहे  वो  पहली  नज़र  में  हुआ  हो  या  वक़्त  लेकर।।

~~~

उस  मुलाकात  ने  मुझे  सोचने  पर  मजबूर  कर  दिया  था,  साथ  ही  हालात  कुछ  ऐसे  बन  गए  थे  कि  शायद  वो  अब  मेरी  तरफ  देखेगी  भी  नही।  उसकी  नाराज़गी  को  2  ही  दिन  हुए  थे  कि  कॉलेज  के  सीनियर्स  को  ये  पता  लग  गया  था  कि,  मैं  उनके  बैच  की  एक  लड़की  को  परेशान  कर  रहा  हू।  जिसके  लिए  उन्होंने  मुझे  कॉलेज  की  कैंटीन  में  घेर  लिया  पर  पता  नही  क्यों  बिना  कुछ  बोले  घूरते  हुए  वहां  से  चले  गए।  उस  दिन  छुट्टी  से  कुछ  मिनटो  पहले  ही  मैं  अपने  2  दोस्तो  के  साथ  गेट  से  बाहर  निकला  और  थोड़ी  दूर  ही  हम  गए  थे  कि  वो  कैंटीन  वाले  सीनियर्स  ने  मुझे  फिर  से  घेर  लिया..  अब  मैं  समझ  गया  कि  उस  टाइम  इन्होंने  क्यों  कुछ  नही  कहा।  शायद  वो  भी  वक़्त  से  पहले  ही  कॉलेज  से  बाहर  आ  गए  थे,  उन्होंने  मेरे  दोस्तों  को  जाने  की  धमकी  दी  अब  वो  10  और  हम  3 लड़  भी  लेते  शायद  पर  मैंने  एक  से  कहा  की  तू  जा  सबको  लेकर  आ  मैं  बातों  में  उलझाता  हू इनको,  ये  सुनकर  एक  वापस  कॉलेज  की  तरफ  गया  और  दूसरा  दूर  से  देखने  के  लिए  हट  गया।  मैं  सोच  रहा  था  कि  पहले  कुछ  बात  होगी  पर  नही  उनमे  से  एक  ने  मेरा  कॉलर  पकड़ना  चाहा  पर  मैने  उसका  हाथ  पकड़  लिया  और  पूछा  भाई  समस्या  क्या  है?...  इतने  में  दूसरा  आगे  आया  और  मेरा  दूसरा  हाथ  मरोड़ते  हुए  कहा  कि  समस्या  तू  है,  तू  नंदिनी (फ़िल्मी नाम)  को  परेशान  क्यों  कर  रहा  है।  उसके  बाद  मैं  कोई  सफाई  पेश  करता  जैसे  फिल्मो  में  हेरोइन  को  बचाने  के  लिए  हीरो  की  एंट्री  होती  है  कुछ  वैसे  ही  लेकिन  यहां  कहानी  थोड़ी सी  अलग  है...  यहां  वो  बोले  तो  अपनी  हेरोइन  स्कूटी  लेकर  बीच  मे  आयी  और  जिसने  मेरा  हाथ  मरोडा  था  उसका  कॉलर  धर  लिया।  उसके  चेहरे  का  हाव-भाव  देखकर  मैं  चक्कर  मे  पड़  गया।


                        तब  तक  उसने  उनसे  कहा  तुमलोगो  को  क्या  परेशानी  है,  ये  मेरा  पीछा  करे  मुझे  परेशान  करे  उससे  तुम्हे  क्या?  और  राहुल (उसके बैच का वो लड़का जो शुरुवात  से ही उसके पीछे  परेशान है।)  मैंने  तुम्हे  पहले  ही  बताया  है  कि  तुम  मुझे  पसंद नही  हो  प्लीज  चीज़े  और  खराब  मत  करो... तबतक  जैसे  फिल्मो  में  पुलिस  मौके  पर  लेट  से  आती  है  वैसे  ही  मेरे  सारे  दोस्त  भी  वहां  पहुचे  सब  उसकी  डेरिंग  देखकर  दंग  थे  और  मैं  ये  सोच  रहा  था  की  ये  साधारण  सी  दिखने  वाली  सीधी-साधी  लड़की  अचानक  इतनी  खतरनाक  और  गुस्से  वाली  कैसे  हो  गयी...  मैं  अभी  अपनी  सोच  से  बाहर  भी  नही  आया  था  कि  मेरे  कानों  में  आवाज़  आयी  की  मैं  भी  उसे  बुलाती  हू  तब  वो  मुझसे  बात  करता  और  मैं  उसे  पसंद  करती  हूं  और  अगर  किसी  को  प्रॉब्लम  है  तो  अभी  बताओ।  उसके  इतना  बोलते  ही  सन्नाटा  पसर  गया  और  सब  वहां  से  चले  गए  और  मुझे  कुछ  समझ  आता  उससे  पहले  उसने  भी  अपनी  स्कूटी  स्टार्ट  की  और  वहां  से  चली  गयी।  मेरे  सारे  दोस्त  मुझे  गले  लगाकर  बधाइयां  देने  लगे  कि  भाई  भाभी  मान  गयी। (अच्छा खासा जीवन यही से बिगड़ता है😜)

         इनसब  के  बाद  शाम  में  मैं  बिना  कुछ  सोचे  उससे  मिलने  पहुच  गया  और  वहां  पहुचकर  उसे  मैसेज  किया  Hiii.  मेरे  मैसेज  के  लगभग   5 मिनट  बाद  ही  जवाब  आया  hllw... मैंने  उससे  कहा  फ्री  हो  तो  मिलते  है...  उसने  कहा  नही  कभी  और...  मैंने  कहा  अच्छा  एक  बार  अपनी  बालकनी  में  तो  आओ.. वो  तुरन्त  ही  अपनी  खिड़की  पर  आयी  और  वही  उसके  घर  के  बाहर  रोड  पर  मैं  खड़ा  था।  वो  मुझे  देखकर  पहले  हल्का  मुस्कुरायी  और  फिर  तुरन्त  ही  गुस्से  में  होकर  अंदर  चली  गयी  और  कुछ  देर  के  बाद  बाहर  आयी।  उसने  मुझे  अपनी  स्कूटी  पर  बैठने  को  कहा  मैंने  कहा  पास  में  पार्क  है  पैदल  चलते  है  (मैंने सोचा इसी  बहाने  थोड़ा  ज्यादा  वक्त  मिलेगा  साथ  में )।  पता  नही  क्यों  वो  थी  तो  गुस्से  में  लेकिन  मेरी  हर  बात  मान  रही  थी  और  हम  साथ  मे  पार्क  की  तरफ  बढ़ने  लगे...

      ऐसे  प्यार  की  कहानियां  सुनाने  वाला  मैं  अपनी  बारी  में  एकदम  डरा  हुआ  सा  था  और  वो  अपना  गुस्सा  अपने  साथ  लिए  थी  इसतरह  कुछ  दूर  तक  दोनों  साथ  होकर  भी  एकदूसरे  से  कुछ  बोल  नही  रहे  थे।  फिर  मैंने  कहा  thank u  उसने  पूछा  क्यों?... मैंने  कहा  मेरे  साथ  आने  के  लिए।  उसने  कहा  कोई  काम  है?... मैंने  कहा  हा  thank u so much  उसने  फिर  कहा  अब  क्यों  मैंने  कहा  तुम्हे  पता  है,  और  हा  तुम  कहती  हो  न  कि  मैं  बाते  घुमाता  बहुत  हु  लेकिन  ऐसा  नही  है  यार  मैं  डरता  बहुत  हु  पर  फिर  भी  अभी  जो  कुछ  बोलूंगा  वो  सिर्फ  तुम्हारे  लिए  होगा।।

मैंने  उससे  कहा  की  हो  सकता  है  कि  कभी  मेरी  कोई  शायरी  तुम्हारे  लिए  ना  हो,  लेकिन  अपने  शब्द  मैं  हमेशा  तुमसे  ही  लिया  करूँगा

ये  भी  हो  सकता  है  की  मुझे  सुबह  उठने  में  लेट  हो  जाये  और  मैं  मिल  ना  पाऊं  पर  मेरा  हर  दिन  खत्म  तुमपर  ही  होगा

ये  भी  हो  सकता  है  कि  कभी  तुम्हारी आंखों  में  आंसू  आ  जाये  मेरी  वजह  से  लेकिन  हर  बार  मुस्कुराने  की  वजह  भी  मैं  ही  बनूँगा...


Chapter-6    
                    हसीन मोड़


हर  बार  मोहब्बक्त  के  शुरू  होने  के  साथ  एक  डर  भी  मन  में  अपनी  जगह  बनाता  है...  वो  डर  तब  तक  नही  होता  है  जब  मोहब्बक्त  एकतरफा  होती  है  क्योंकि  उसमे  हम  अकेले  होते  है... बल्कि  ये  डर  तब  जहन  में  आता  है  जब  हम  उसे  पा  लेते  है  जिसे  पाने  के  लिए  परेशान  रहते  है।।।

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