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Showing posts from April, 2021

पतन त्योहारों का!!

  मैंने  पढा  था  कही  की  त्योहार  खुशिया  मनाने  और  गमो  को  भूल  जाने  के  लिए  मनाए  जाते  है,  और  हमारे  यहां  तो  हर  त्योहार  की  अपनी  एक  कहानी  है।  कोई  त्योहार  हमे  सिखाता  है,  बुराई  पर  सदैव  अच्छाई  की  ही  जीत  होती  है  तो  कोई  बताता  है  कि  अधर्म  पर  धर्म  की  विजय  तय  है... ये  सब  पढ़ने  और  समझने  के  बाद  ये  समझ  आता  है  कि  त्योहार  सिर्फ  खुशिया  बाटने  और  हर्षोउल्लास  से  नही  जुड़ा  बल्कि,  ये  हमारे  धर्म  और  संस्कार की  पहचान  कराता  है।  त्योहारों  का  होना  यानी  धर्म  और  संस्कार  का  होना।।  आज  हम  आधुनिकता  के  उस  दौर  से  गुजर  रहे  है,  जहाँ  हम  अपनी  सुख  सुविधाओं  में  अपने  त्योहारों  के  असली   मायने  तक  भूल  गए  है।  मुझे  पता  है  हम  में  से  कितने  है,  जिन्हें  कोई  फर्क  नही  पड़ता  क्योंकि  हम  हर  त्योहार  सोशल  मीडिया  और  व्हाट्सएप्प  पर  स्टेटस  लगाकर  मना  रहे  है,  लेकिन  सोचना  ये  है  कि  कही  ऐसे  ही  हमारी  पहचान  हमारी  संस्कृति  इसी  फोन  में  सिमट  के  ना  रह  जाये।।। बीते  कुछ  दिन  पहले  हमारे  यहां  एक  त्योह